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वरिष्ठ लिपिक की गिरफ्तारी की शासन से अनुमति मिली

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फर्रुखाबाद। बिना ड्यूटी साढ़े तीन वर्ष तक सिपाही का वेतन निकलने के मुकदमे में आरोपी वरिष्ठ लिपिक को गिरफ्तार करने की अनुमति शासन ने दे दी है। पुलिस दबिश की भनक लगते ही वरिष्ठ लिपिक अवकाश पर चला गया है। इससे गिरफ्तारी के लिए 15-पीएसी आगरा गई पुलिस टीम खाली लौट आई।
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कानपुर नगर जिले के शिवराजपुर थाना क्षेत्र के गांव कपूरापुर निवासी सिपाही नरेश यादव का तबादला अप्रैल 2016 में पुलिस लाइन से जहानगंज थाने हुआ था। नरेश ने थाने में आमद नहीं कराई। किंतू बिना ड्यूटी किए साढ़े तीन साल तक उसका वेतन निकलता रहा। 13 दिसंबर 2019 को बीमारी से नरेश की मौत हो गई थी। पत्नी सीमा यादव ने तत्कालीन आरआई किश्वर अली को सिपाही की मौत की सूचना दी। इसके बाद विभाग को नरेश यादव की याद आई।
तत्कालीन एसपी डॉ. अनिल मिश्रा ने एएसपी त्रिभुवन सिंह से जांच कराई। एएसपी की जांच रिपोर्ट के आधार पर एसपी ने गणना मोहर्रिर कोमल सिंह, कैश के एचसीपी अशोक शुक्ला और मुंशी शाहिद को निलंबित कर दिया था। नरेश सहित कई सिपाहियों की चरित्र पंजिका में फर्जी एंट्री करने के आरोप में तत्कालीन वरिष्ठ लिपिक प्रेमचंद्र राजपूत के खिलाफ कार्यालय के लिपिक ने फतेहगढ़ कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। प्रेमचंद्र अब 15 पीएसी आगरा में तैनात है।
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आरोपी प्रेमचंद्र की पीएसी मुख्यालय से गिरफ्तारी के लिए पीएसी के अधिकारियों ने अनुमति नहीं दी थी। इस पर एसपी अशोक कुमार मीणा ने गृह सचिव को पत्र लिखा। गृह सचिव ने वरिष्ठ लिपिक की गिरफ्तारी की अनुमति दे दी है। इसकी भनक लगने पर प्रेमचंद्र राजपूत 15 पीएसी आगरा के कमांडेंट से अवकाश लेकर अपने घर चला गया है।
मुकदमे की जांच कर रहे सिविल लाइन चौकी इंचार्ज आनंद शर्मा ने फोर्स के साथ लिपिक प्रेमचंद्र की तलाश में 15 पीएसी आगरा में दबिश दी लेकिन आरोपी हाथ नहीं आया। प्रेमचंद्र मैनपुरी जिले के बिछवां थाना क्षेत्र के एक गांव का निवासी है। 15 पीएसी आगरा के वरिष्ठ लिपिक देवेंद्र शर्मा ने फतेहगढ़ पुलिस की दबिश देने की पुष्टि की। विवेचक आनंद शर्मा ने इस संबंध में कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया है।
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