फर्रुखाबाद। मुख्यमंत्री पशुधन सहभागिता योजना के तहत पशुपालकों को दी गईं करीब 1200 गायें लापता हैं। उनके भरण-पोषण के लिए बीडीओ की संस्तुति पर 900 रुपये प्रति गोवंश भुगतान भी होता रहा। सीडीओ के आदेश पर पशु चिकित्सा विभाग से सत्यापन कराया गया तो योजना की पोल खुली। फिलहाल उनका भुगतान रोक दिया गया है।
गोवंश संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर गोशालाओं का निर्माण कराया गया। इसके साथ ही वर्ष 2020 में मुख्यमंत्री पशुधन सहभागिता योजना शुरू की गई। योजना के तहत गोशाला से पशुपालकों को मुफ्त में गाय दी गईं। इन गायों के भरण-पोषण के लिए पशुपालक को प्रति गोवंश 30 रुपये दिन के हिसाब से भुगतान दिया जाता रहा। शासन से जिले को योजना के तहत 1793 गायें पशुपालकों को देने का लक्ष्य दिया गया था।
अधिकारियों के प्रयास से धीरे-धीरे लक्ष्य भी लगभग पूरा कर लिया गया था। इसके बाद इन पशुपालकों को प्रति गाय के हिसाब से करीब 900 रुपये महीने पशुपालन विभाग से भुगतान भी किया जाता रहा। भुगतान के लिए प्रधान और सचिव की रिपोर्ट पर बीडीओ संस्तुति करते रहे।
बिना गाय के भुगतान लेने और गायों को छोड़े जाने की शिकायतें मिलने पर मुख्य विकास अधिकारी एम. अरून्मोली ने पशुपालन विभाग से सत्यापन कराया। नवंबर 2021 में सत्यापन के लिए टीमें मौके पर गईं तो कई पशुपालकों के पास गायें मिलीं ही नहीं, जबकि गाय के भरण-पोषण के नाम पर भुगतान लेते रहे।
पशु चिकित्सकों के अनुसार जनपद में 1793 गोवंश पशुपालकों को दिए जाने का लक्ष्य था। इसके सापेक्ष करीब 1750 गायें गोशालाओं से पशुपालकों को दी गईं थीं। इन गायों की टैगिंग भी की गई थी, जिससे पहचान की जा सकें। पशुपालक ने गायें छोड़ दीं या फिर मर गई, इसकी पुष्टि के लिए प्रधान और सचिव को भुगतान के दौरान बीडीओ को रिपोर्ट देनी होती है।
बीडीओ की संस्तुति पर पशुपालक को सीधे खाते में भरण-पोषण की धनराशि स्थानांतरित की जाती है। सत्यापन के दौरान ब्लाक शमसाबाद में 49, मोहम्मदाबाद में 45, नवाबगंज में 50, कमालगंज में 76, बढ़पुर में 36, कायमगंज में 26 व ब्लाक राजेपुर में 48 पशुपालकों के पास गायें मौके पर पाईं गईं। 330 पशुपालकों के पास मिलीं 547 गायों की रिपोर्ट सभी टीमों ने पशुपालन विभाग को दी हैं।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजकिशोर सिंह ने बताया कि सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर दिसंबर 2021 में 547 गोवंशों की तीन-तीन माह की भरण-पोषण धनराशि का भुगतान किया गया। शेष सभी का भुगतान रोक दिया गया है। आशंका है कि पशुपालकों ने गोशाला से गाय लेने के बाद फिर छोड़ दी होंगी। शासन और प्रशासन के दिशा निर्देशों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सत्यापन के बाद ही भुगतान किया जाएगा।