फर्रुखाबाद। बस अड्डा की जमीन पर कब्जे के मामले को जिलाधिकारी ने गंभीरता से लिया। निर्देश के बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने एसडीएम की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच टीम बना दी। उनसे तीन दिन में रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। कमेटी में तहसीलदार, ईओ, एआरएम व विनियमित क्षेत्र के जेई को सदस्य बनाया गया है।
रोडवेज बस अड्डा के पूर्वी गेट पर कई दशक से चल रहे होटल को विनियमित क्षेत्र के जेई और ईओ ने टीम के साथ पहुंचकर गिरा दिया था। परिवहन निगम ने इस भूमि पर कैंटीन के लिए ठेका देकर नापजोख भी करवा दी। जब ठेकेदार दुकान बनाने सामान लेकर पहुंचा, तो एसडीएम सदर के मौखिक निर्देश पर कादरीगेट थाना पुलिस ने काम रुकवा दिया।
उसी रात ढाबा संचालक ने दोबारा काउंटर लगाकर कब्जा कर लिया। इस मामले में ठेकेदार रानू शर्मा ने अधिकारियों को पत्र देकर समस्या समाधान की मांग की थी। एक मार्च के अंक में अमर उजाला ने, दबंगों के अतिक्रमण से त्रस्त ठेकेदार नहीं खोल पा रहा कैंटीन, शीर्षक से प्रमुखता से खबर प्रकाशित की। इस मामले को जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह ने गंभीरता से लिया। उन्होंने खबर का संज्ञान लेकर सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार बंसल को कमेटी बनाने के निर्देश दिए।
सिटी मजिस्ट्रेट ने एसडीएम सदर गजराज सिंह की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी बना दी। तहसीलदार सदर श्रद्धा पांडेय, ईओ नगर पालिका विनोद कुमार, रोडवेज एआरएम और विनियमित क्षेत्र के जेई सदस्य बनाए गए। तीन दिन में जांच आख्या देने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि नगर पालिका पहले ही भूमि परिवहन निगम की होना मान चुकी है।
ईओ ने माना- परिवहन निगम की है जमीन
फर्रुखाबाद। फिरोजाबाद जिले के शिकोहाबाद निवासी ठेकेदार रानू शर्मा ने 28 फरवरी को मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत की थी। उसके जवाब में अधिशासी अधिकारी विनोद कुमार ने पांच मार्च को पत्र दिया। इसमें कहा कि पालिका सर्वेयर की आख्या के अनुसार की गई शिकायत पर परिवहन निगम की भूमि पर संचालित अवैध होटल (ढाबा) को विनियमित क्षेत्र एवं पालिका की टीम हटवा चुकी है। भूमि परिवहन निगम के अधिकार क्षेत्र में है। लिहाजा हर तरह का आवंटन परिवहन निगम ही करेगा। (संवाद)
तीन साल पहले गिराई गई थी पक्की दुकान
फर्रुखाबाद। जिला प्रशासन ने जनवरी 2021 में रोडवेज बस अड्डा के बाहर बनी दो-दो मंजिला 33 दुकानों को गिरा दिया था। फिलहाल जिस भूमि पर विवाद चल रहा है। यहां भी पक्की दुकान बनी थी। सवाल उठता है कि उस समय प्रशासन की रिपोर्ट में यह परिवहन निगम की भूमि थी, तो अब विभाग को कब्जा लेने में दिक्कत क्यों आ रही है। (संवाद)