फर्रुखाबाद। घर में घुसकर मारपीट और जातिसूचक गाली-गलौज करने के 11 वर्ष पुराने मामले में मिथ्या गवाही होने पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। न्यायालय ने मामले के छह आरोपियों को दोष मुक्त कर दिया। वहीं वादी सहित चार के विरुद्ध प्रकीर्ण वाद दर्ज करने के आदेश के साथ सरकारी सहायता की धनराशि को छह प्रतिशत ब्याज के साथ वसूलने के साथ ही नोटिस जारी करने के भी आदेश दिए।
थाना मऊदरवाजा क्षेत्र के मोहल्ला सूफी खां निवासी राजेश्वरी देवी ने एसपी के आदेश पर 5 जुलाई 2014 को मोहल्ले के ही शाहरुख खान, शाहयार खान, जावेद खान, शमशाद, शाहनवाज और महताब खान के खिलाफ शिकायत की थी। आरोप था कि मोहल्ले के नेता महताब खान गुंडई के बल पर उसके मकान पर कब्जा करना चाहते हैं। मारपीट, पथराव, फायरिंग, लूटपाट व जातिसूचक गालियों के आरोप लगाते हुए एससी/एसटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
पुलिस ने विवेचना के बाद सभी के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान आरोपी महताब खां की मौत हो गई। इसके चलते उसके विरुद्ध कार्रवाई रोक दी गई। मुकदमे की सुनवाई के दौरान वादी व गवाहों ने अपने ही आरोपों को झूठा बताते हुए बयान दिए। साक्ष्यों के अभाव में विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट अभिनितम उपाध्याय ने सभी जीवित आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। न्यायालय ने मिथ्या गवाही देने पर वादी सहित चार लोगों (वादी राजेश्वरी देवी, मुकेश, आरती और यादराम) के विरुद्ध प्रकीर्ण वाद दर्ज करने के आदेश दिए। साथ ही एससी/एसटी एक्ट के तहत सरकार द्वारा दी गई 15-15 हजार रुपये की सहायता राशि (कुल 45 हजार रुपये) को छह प्रतिशत ब्याज सहित वसूल करने के निर्देश दिए गए। आदेश के अनुपालन के लिए जिलाधिकारी व समाज कल्याण अधिकारी को भी आदेश की प्रतिलिपि भेजने के निर्देश दिए गए हैं।