कमालगंज। सप्तऋषि क्षेत्र स्थित महान ऋषि श्रृंगी की तपस्थली श्रृंगीरामपुर में लगे शिवरात्रि मेले में रविवार को आस्था का सागर उमड़ पड़ा। गंगा तट से रजीपुर तक सड़क पर शिवभक्तों का रेला दिखाई पड़ा। कांधे पर रखे कांवड़ की बजती घंटी व पैरों में घुंघरू की आवाज के बीच श्रद्धालु बोल बम का उद्घोष करते चल रहे थे।
रविवार सुबह से ही मध्यप्रदेश के दतिया, शिवपुरी, भिंड, ग्वालियर, मुरैला आदि क्षेत्रों से कांवड़ियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया। कांवड़ सजाने के बाद शिवभक्तों ने गंगा तट पर पहुंचकर स्नान पूजन किया। कांवड़ में जल भरकर हर-हर, बम-बम के उद्घोष के साथ वे आगे बढ़ते गए। दोपहर होते ही तीन किलोमीटर क्षेत्र में रजीपुर तक शिवभक्तों का रेला दिखाई देने लगा।
सभी जत्थे अपनी टोली के महंत के निर्देश पर चल रहे थे। श्रृंगी ऋषि मंदिर में भी दर्शन-पूजन का सिलसिला चलता रहा। कई टोलियों में महिला श्रद्धालुओं ने भी कांवड़ उठाई। भिंड़ के राजहोली मोहल्ले में अनुपमा ने बताया कि वह शादी के बाद आठ साल से कांवड़ लेकर जा रहीं हैं। उनकी 21 की कांवड़ियों की टोली में पांच महिला शिवभक्त भी शामिल हैं।
भिंड जिले के थाना गोहद चौराहा के गांव श्यामपुरा के जत्थे में शामिल महंत सतीश सिंह कसना ने बताया कि वह लोग किशनी, इटावा, भिंड होते हुए 38 घंटे में अपने गांव तक 250 किलोमीटर की दूरी तय करेंगे। शिवरात्रि पर जल चढ़ाने के बाद फिर अगले दिन तक व्रत छूटेगा। यहां से चल कर कुल 60 घंटे तक फलाहार रहेगा।
- दतिया जिले की सेवड़ा तहसील के डांग निवासी शिवराम ने बताया कि शिवरात्रि के दिन उनके जत्थे के सभी कंवाड़िया सीधे शिव मंदिर पहुंचेंगे। वहां कांवड़ों का जल एक बड़े बर्तन में रखा जाएगा। पहले मान्य पक्ष के भांजे, दामाद और फिर माता-पिता श्रृंगीरामपुर तीर्थस्थली के गंगाजल से मंदिर में महादेव का जलाभिषेक करेंगे।
कांवड़ियों के मेले में पुलिस बल की कमी से भारी अव्यवस्था रही। श्रृंगीरामपुर में रामलीला मैदान से पहले सड़क की पटरी पर दोनों ओर वाहन खड़े थे। बीच सड़क पर भी वाहन आने-जाने से जाम लगा रहा। श्रद्धालुओं के अलावा कन्नौज तक जाने वाले संयोगिता मार्ग पर भी जाम रहा।
श्रृंगीरामपुर चौराहे से गांव होते हुए और फिर श्रृंगीऋषि मंदिर से गौरीशंकर मंदिर तक 3 किलोमीटर की दूरी में करीब एक हजार दुकानें लगी हैं। इन पर जमकर खरीदारी हुई। दुकानदारों ने कहा कि 7 फीट की दुकान का किराया चार हजार चुकाना पड़ा है। बोल बम, तड़क बम का जयकारा लिखी टोपी की खूब बिक्री हुई महिला श्रद्धालु भी टोपी लगाए चल रही थीं। कांवड़ सजाने के सामान की बिक्री अधिक हुई। दुकानदारों ने बताया कि कुछ स्थानों पर बिजली के तार टूटे पड़े होने से समस्या रही। गंगा तट पर करीब 200 दुकानों पर खरीदारी हुई।
अमूमन दो डालियों की कांवड़ बनाई जाती है। इस बार 101 व 251 डालियों की चौकोर कांवड़ की भी धूम रही। 101 डालियों की कांवड़ को 4 व 251 डालियों की कांवड़ को 6 श्रद्धालु लेकर चल रहे थे।
श्रृंगीरामपुर घाट से जल भरकर ले जाते कांवड़िए। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD