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रामगंगा ने अलादपुर भटौली को किया मौत के मुहाने पर खड़ा

Sat, 09 Jul 2016 11:13 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/फर्रुखाबाद
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गांव की ओर बढ़ रही रामगंगा को देखते ग्रामीण। - फोटो : अमर उजाला
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रामगंगा के कटान से तहसील अमृतपुर के गांव अलादपुर भटौली के बाशिंदे मौत के मुहाने पर पहुंच गए हैं। कब यह गांव गंगा में समा जाए, इसको लेकर समूचे गांव के लोगों की नींद उड़ी हुई है। कभी तीन किलोमीटर की दूरी पर इस गांव से बहने वाली रामगंगा अब केवल गांव से पांच मीटर दूर रह गई हैं।
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गांव अलादपुर भटौली के रहने वाले 98 वर्षीय मुंशीलाल का कहना है कि वर्ष 1940 में रामगंगा गांव से तीन किलोमीटर की दूरी पर बहती थी। करीबन 1980 में रामगंगा नदी ने पूरे गांव को काटकर गैर आबाद कर दिया। नतीजतन फिर तीन किलोमीटर दूर जाकर गांव के लोगों ने गांव अलादपुर भटौली बसाया। 36 साल के अंतराल में फिर रामगंगा धीरे-धीरे गांव की ओर बढ़ती आई।

हालात यह हैं कि रामगंगा किसी भी समय समूचे गांव को अपनी चपेट में ले सकती है। गांव के ही बलजीत (90) का कहना है कि इस गांव का रकबा साढ़े छह हजार बीघा था, जिसे रामगंगा ने काटकर समाप्त कर दिया है। मौजूदा समय में यहां के लोगों के पास अब न के बराबर भूमि बची है। परिजन दिल्ली, मुंबई, कानपुर जैसे महानगरों में जाकर नौकरी कर रहे हैं तथा कुछ लोग अन्य गांवों में जाकर बंटाई पर खेती कर रहे हैं।
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हरीराम (80) बताते हैं कि इस गांव की आबादी करीबन एक हजार के आसपास है। लेकिन गांव में मौजूदा समय में युवा देखने को नहीं मिलेगा। सभी युवा महानगरों में मजदूरी के लिए चले गए हैं। जोगराज (75) का भी लगभग यही कहना है। उनका कहना है कि समूचा गांव दहशत में हैं। रामगंगा नदी गांव से केवल पांच मीटर दूर रह गई है। किस समय यह गांव गंगा में समा जाए। यहां के लोगों को यही चिंता खाए जा रही है।

गांव के लोग रामगंगा किनारे बैठकर उसके कटान की गति को देखते हैं। जोगराज का कहना है कि रामगंगा जिस तरह से कटान कर रही है। उसकी वजह से यहां के लोगों की रात की नींद और दिन का चैन चला गया है। लोग जाग-जागकर रातें बिता रहे हैं।
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