फर्रुखाबाद। शासन से भेजी गई जांच टीम ने राजकीय नलकूप विभाग में दूसरे दिन भी भुगतान संबंधी रिकार्ड खंगाले। कैशबुक से भी मिलान किया गया। इससे जिम्मेदारों की धड़कनें तेज हो गई हैं। लेखाकार से हस्ताक्षर कराए बिना करोड़ों का भुगतान करना विभागीय अधिकारियों के गले की फांस बन गया है।
राजकीय नलकूप विभाग में लेखाकार से हस्ताक्षर कराए बिना करोड़ों का भुगतान किया गया है। इसकी जांच के लिए शासन से सोमवार को टीम आई और उसने विभाग में डेरा डाल दिया। मंगलवार को दूसरे दिन भी जांच अधिकारियों ने भुगतान संबंधी रिकार्ड खंगाले। पता चला है कि नवंबर 2021 में पंपहाउस निर्माण के लिए गुपचुुप तरीके से टेंडर निकाले गए थे।
जांच टीम ने टेंडर के प्रचार-प्रसार के संबंध में पूछताछ की तो जिम्मेदार जवाब नहीं दे सके। भुगतान में कई बिल वाउचरों पर लेखाकार के हस्ताक्षर नहीं मिले। बताया जा रहा है कि लेखाकार ने भुगतान के कुछ बिल वाउचरों पर आपत्तियां लगाई थीं, जिनका निस्तारण नहीं किया गया और पत्रावली वापस लेकर भुगतान कर दिया गया था।
इसी के बाद लेखाकार को दरकिनार कर लाखों का भुगतान किया गया। मार्च में एक करोड़ 70 लाख के बिल वाउचरों में एक-दो को छोड़कर अधिकांश पर लेखाकार के हस्ताक्षर नहीं हैं। अधिशासी अभियंता के हस्ताक्षर से ही भुगतान कर दिया गया। अधिशासी अभियंता का कहना है कि लेखाकार ने हस्ताक्षर किए ही नहीं, जबकि लेखाकार का कहना है कि उन्हें चेक करने के लिए भुगतान की पत्रावलियां ही नहीं दी गईं।
फिलहाल जांच कमेटी के तीनों अधिकारी टेंडर, वर्कआर्डर, कैशबुक व रजिस्टर खंगालने में जुटे हैं। उनका कहना है कि जांच रिपोर्ट सीधे वित्त नियंत्रक को सौंपी जाएगी। जांच होने से जिम्मेदारों के चेहरों की हवाइयां उड़ी हैं। खंड कार्यालय की बजाय अधिशासी अभियंता के सरकारी आवास पर पत्रावलियां मंगाकर जांच करने पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।