इन दिनों जनपद की बिजली सप्लाई व्यवस्था धड़ाम हो गई
है। शहर से लेकर गांव तक बिजली के लिए हाय तौबा मची है। आलम यह है कि शहरी
इलाकों में लोगों को महज दस घंटे ही बिजली मिल रही है। ग्रामीणों को तो
बमुश्किल पांच घंटे ही बिजली रही है। पर्याप्त बिजली न मिलने से किसानों की
फसलें सूखने लगी हैं।
जनपद के शहरी इलाकों में 15 और ग्रामीण अंचल
में 10 घंटे बिजली आपूर्ति का रोस्टर है। अघोषित कटौती और लोकल फाल्टों
के चलते इन दिनों यह रोस्टर धड़ाम हो गया है। कर्मचारियों को रोस्टर के
अनुसार बिजली कटौती तो याद रहती है, किंतु आपूर्ति के समय भूल जाते हैं।
इससे
अधिकांश समय बिजली गायब रहती है। शहरी इलाकों में दिन में 11 से 4 बजे तक
बिजली आपूर्ति के समय लोकल फाल्ट दिखाकर एक से दो घंटे तक बिजली काट ली
जाती है। शाम को सात बजे आपूर्ति शुरू होते ही बिजली की आंख मिचौली का खेल
शुरू हो जाता है। हर आधे घंटे बाद दस मिनट के लिए बिजली गुल हो जाती है।
यह
खेल रात 10 बजे तक चलता है। इसके बाद दो से तीन घंटे इमरजेंसी कटौती कर ली
जाती है। तड़के तीन बजे से सुबह छह बजे तक कटौती रहती है। रात की कटौती से
लोगों की नींद हराम हो गई है।
यही हाल ग्रामीण इलाकों का है। देहात
में दस घंटे बिजली सप्लाई का रोस्टर है, किंतु ग्रामीणों को बमुश्किल पांच
घंटे ही बिजली नसीब हो रही है। पर्याप्त बिजली न मिलने से किसान फसलों की
सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। इससे फसलें सूख रही हैं। बिजली की अघोषित कटौती
के कारण शहर से लेकर गांव तक हाहाकार मचा है।