फर्रुखाबाद। मेरापुर थानाक्षेत्र के गांव नूरनगर निवासी जनसेवा केंद्र संचालक रंजीत को पकड़कर दो लाख रुपये की मांग के मामले में निलंबित सिपाही व दीवान का वेतन रोकने की तैयारी की जा रही है। तीनों ने निलंबन के बाद से पुलिस लाइन में आमद नहीं कराई है। इस संबंध में पुलिस लाइन में रिपोर्ट तैयार की जा रही है। वहीं, आरोपी दोनों सिपाही व दीवान सत्येंद्र कुमार कार्रवाई से बचने के लिए हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। सत्येंद्र के कई आईपीएस अफसरों से ताल्लुक हैं। ऐसे में वह हाईकोर्ट के अलावा शासन में भी पैरवी करने में लगा है।
मुकदमे की जांच कर रहे सीओ कायमगंज सोहराब आलम विवेचना के दौरान सिपाही रिंकू कुमार और कपिल सहित दीवान सत्येंद्र यादव के नाम सामने लाए। सीओ ने रंजीत समेत कई लोगों के बयान भी दर्ज किए हैं। 12 अक्तूबर को निलंबन के बाद से दोनों सिपाहियों व दीवान ने पुलिस लाइन में आमद नहीं कराई है। आमद न करवाने पर तीनों का वेतन रोके जाने के संबंध में पुलिस लाइन के गणना व कैश कार्यालय में रिपोर्ट तैयार की जा रही है। यह 20 अक्तूबर को आरआई व सीओ लाइन के हस्ताक्षर कराने के बाद अकाउंटेंट के पास भेजी जाएगी।
जांच में नाम न आने के बाद भी रंजीत को पकड़ा
फर्रुखाबाद। शहर कोतवाली की आवास विकास कालोनी निवासी अभिनव गुप्ता ने एसपी अशोक कुमार मीणा को एक मोबाइल नंबर के खिलाफ धोखाधड़ी करने के आरोप में प्रार्थना पत्र दिया था। एसपी के आदेश पर दो सितंबर को अज्ञात के खिलाफ शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया था। मुकदमे की जांच कादरीगेट चौकी इंचार्ज राजेश राय को दी गई।
उन्होंने मुकदमे की जांच शुरू की तो दो नाम प्रकाश में आए। जब वह छानबीन करने गए तो दोनों नाम सही नहीं मिले। मुकदमे में मेरापुर थाना क्षेत्र के गांव नूरनगर निवासी रंजीत का नाम प्रकाश में भी नहीं आया था। फिर सर्विलांस के दीवान सत्येंद्र यादव ने उसको पकड़ने के लिए क्यों जोर दिया, यह जांच का विषय है। इसके बाद आवास विकास चौकी इंचार्ज विशेष कुमार, शहर कोतवाली के दीवान राम नरेश यादव, सिपाही जीतू कुमार ने रंजीत को पकड़ने की योजना तैयार की।
इन लोगों ने नूरनगर में दबिश भी मारी थी। लेकिन उस दिन रंजीत अपने जन सेवा केंद्र पर नहीं मिला था। इसके बाद सत्येंद्र ने मोबाइल की लोकेशन निकालकर सिपाही रिंकू कुमार व कपिल को रंजीत को पकड़ने के लिए भेजा था। इस पूरे मामले में किसी पुलिस अधिकारी की शह होने की बात भी सामने आ रही है। जब मामला खुल गया तो पुलिस अफसर भी चुप्पी साध गए। विवेचक राजेश राय ने बताया कि अभिनव गुप्ता के मुकदमे में रंजीत का नाम प्रकाश में आया ही नहीं है।
यह है मामला
रंजीत को 10 अक्तूबर को सर्विलांस के दीवान सत्येंद्र के कहने पर थाने के दो सिपाहियों ने पकड़ लिया था। रंजीत को छोड़ने के नाम पर सिपाहियों ने दो लाख रुपये की मांग की थी। दोनों सिपाही रंजीत को पूरे दिन मोहम्मदाबाद, फतेहगढ़ व शहर कोतवाली क्षेत्र में कार में बैठाकर घुमाते रहे और बाद में आवास विकास चौकी के कमरे में बंद कर दिया था। रंजीत के पिता ने अमृतपुर विधायक सुशील शाक्य से पूरे मामले की शिकायत की थी। विधायक सुशील शाक्य ने आईजी जोन मोहित अग्रवाल को पूरे मामले की जानकारी दी थी। आईजी के आदेश पर एएसपी अजय प्रताप ने सिपाही रिंकू कुमार, कपिल व सर्विलांस सेल के दीवान सत्येंद्र को निलंबित कर दिया था। रंजीत की तहरीर पर दो अज्ञात सिपाहियों के खिलाफ मेरापुर थाने में भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज कराया गया।