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Farrukhabad News: लागत से भी कम दाम पर बेचना पड़ रहा आलू

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फोटो-01, खुदागंज-फतेहगढ़ रोड पर सड़क किनारे डाला गया सड़ा आलू। संवाद
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फर्रुखाबाद/कमालगंज। किसानों और व्यापारियों की किस्मत चमकाने वाले सब्जियों के राजा आलू ने इस बार ऐसी करवट ली कि हर कोई परेशान है। शीतगृहों में भंडारण को साढ़े चार माह बीत गए लेकिन भाव नहीं चढ़ रहा। हालात ऐसे हैं कि किसानों का आलू 100 रुपये क्विंटल बिक रहा है। बोरा, ट्रैक्टर का भाड़ा, लदाई व उतराई जोड़ें तो आलू बिल्कुल मुफ्त में जा रहा है। 15 प्रतिशत आलू सड़ा भी निकल रहा है।
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ब्लाॅक क्षेत्र के जहानगंज इलाके में आलू शीतगृहों के अंदर बिकता है। यानी किसानों को शीतगृह का भाड़ा व निकासी का पैसा नहीं देना पड़ता। यह खर्च व्यापारी उठाते हैं। शीतगृहों के अंदर हाइब्रिड सफेद आलू ख्याती व पुखराज 50 रुपये पैकेट यानी 100 रुपये क्विंटल बिक रहा है। लाल आलू कंचन का भी यही हाल है। यह शीतगृह के अंदर 125 से 150 रुपये क्विंटल है। चिप्सोना और हालैंड का औसत भाव 250 रुपये क्विंटल चल रहा है। आलू की इन किस्मों में लागत अधिक और माल कम निकलता है। इसलिए यह किस्में भी किसानों को घाटे के गर्त में धकेल रही हैं।
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होली के समय आए आलू में सड़न ज्यादा
शीतगृहों से निकल रहे आलू में काफी मात्रा में सड़ा-गला निकल रहा है। खरीदने के बाद व्यापारी बोरों को निकलवाकर आलू की सुखाई करा रहे हैं। सड़ा-गला-कटा आलू 10 से 15 प्रतिशत निकल रहा है। शीतगृहों के अंदर से सड़े आलू के बोरे अलग से निकाले जा रहे हैं। सड़े आलू को ट्राली से शीतगृह से दूर सड़क किनारे फिकवाया जा रहा है। व्यापारियों का कहना है कि होली के समय गर्मी बहुत पड़ रही थी। उस समय जो आलू शीतगृहों में पहुंचा था, उसमें सड़न की शिकायत ज्यादा है। कई किसान खेत में पैकेट में भरते समय कटा, सड़ा व चुटहिल आलू अलग न करके उसी में भरकर शीतगृह भेज देते हैं। उस वजह से भी आलू अधिक सड़ा निकल रहा।
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121 शीतगृहों में 9,72,812 एमटी भंडारण, 20.5 प्रतिशत निकासी
जिले में इस बार 12 शीतगृह बढ़कर 121 हो गए, इनमें 9 लाख 72 हजार 8 सौ 12 मीट्रिक टन आलू भंडारित हुआ। बृहस्पतिवार को उद्यान विभाग की ओर से उच्च अधिकारियों को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार 1 लाख 99 हजार 4 सौ 26 (20.5 प्रतिशत) मीट्रिक टन ही आलू की निकासी हुई है। अक्तूबर से नए आलू की बोआई का समय आ जाएगा। ऐसे में किसानों, व्यापारियों व शीतगृह संचालकों में बेचैनी है। आलू व्यापारी इस्लाम निराला कहते हैं कि पिछले साल इस समय तक करीब 30 प्रतिशत निकासी हुई थी।

क्या कहते हैं जिम्मेदार
जिला आलू विकास व उद्यान अधिकारी राघवेंद्र सिंह का कहना है कि जितना आलू बाहर की मंडियों में जाना चाहिए, उतना नहीं जा पा रहा है। इसके साथ ही इस बार अधिक बारिश न होने की वजह से भी आलू के भाव नहीं बढ़ पा रहे।
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