कमालगंज। पूर्वांचल व दूसरे राज्यों में आलू की मांग बढ़ने से 30 से 50 रुपये पैकेट भाव में उछाल आया है। शीतगृहों में मई से जुलाई 3 माह में 20 प्रतिशत ही आलू की निकासी हुई है।
इस बार आलू की बंपर पैदावार हुई। शीतगृहों में क्षमता से अधिक आलू भरा गया। अप्रैल के अंतिम दिनों में निकासी शुरू होकर मई की शुरुआत रफ्तार पकड़ लेती थी लेकिन कोरोना कर्फ्यू के चलते ऐसा न हो सका। जून में शीतगृहों से निकासी पर भाव टूटता गया। लेकिन कर्फ्यू खत्म होते ही अन्य राज्यों व शहरों के लिए लोडिंग शुरू हो गई। इससे भाव बढ़ गया। ककरैया निवासी आलू व्यापारी शरद कुमार
का कहना है कि 300 से 350 रुपये पैकेट बिक रहा ख्याती व पुखराज अब 350 से 400 रुपये भाव पर पहुंच गया है। वहीं चिपसोना अब 450 से 500 रुपये प्रति पैकेट(50 किलो) तक बिक रहा है। इसके भाव में भी 50 रुपये का इजाफा हुआ है। हालैंड का भाव सबसे ज्यादा है। इसकी मांग नेपाल तक रहती है। हालैंड आलू 550 से 575 रुपये पैकेट व्यापारी खरीद रहे हैं। महमदपुर अचला निवासी किसान व व्यापारी इशरार खां ने बताया कि बारिश से तोरई व भिंडी सहित कई सब्जियों का भाव बढ़ने से आलू की खपत बढ़ी है।
जिला आलू विकास अधिकारी आरएन वर्मा का कहना है कि पिछले साल इस समय तक करीब 45 प्रतिशत आलू शीतगृहों से निकल चुका था। वहीं इस बार 19 से 20 प्रतिशत निकासी हुई है। जिले के शीतगृहों में पिछले वर्ष 7 लाख 30 हजार मीट्रिक टन आलू भंडारित हुआ था। वहीं इस वर्ष 8 लाख 80 हजार मीट्रिक टन भंडारण हुआ है। यह इसलिए कि पिछले साल भाव अधिक होने से बुआई का रकबा बढ़ा और अनुकूल मौसम से उपज खूब हुई। जबकि लाकडाउन से खपत घट गई। आलू के विकल्प रूप में अन्य उपजों का विकल्प भी किसानों को ध्यान में रखना होगा।