रविवार को शहर से लेकर देहात तक जश्ने गौस-ए-आजम की धूम रही। कहीं कुरआन
ख्वानी व मीलाद की महफिलें सजीं तो कहीं कव्वाली का कार्यक्रम हुआ। दरगाह
हुसैनिया मुजीबिया से इत्र व गुलाब की वर्षा के बीच गागर जुलूस उठा।
अकीदतमंदों ने झंडा शरीफ में मन्नत के चिरांगा चढ़ाकर मुरादें मांगीं।
मुसलमानों
ने हजरत बड़े पीर साहब की याद में जश्न-ए-गौसे आजम अकीदत के माहौल में
मनाया। सायंकाल दरगाह हुसैनिया मुजीबिया से सज्जादा नशीन की अगुवाई में
परंपरानुसार गागर जुलूस उठा। लोगों ने जगह-जगह जुलूस का इस्तकबाल किया।
छतों से इत्र व गुलाब और पुष्पवर्षा होती रही। मुन्ना मेहरबान ताज कव्वाल
ने सूफियाना कलाम पेश कर समां बांधा। जुलूस में भीड़ इस कदर उमड़ी कि कटरा
बख्शी से लेकर दरगाह झंडा शरीफ तक तिल रखने की जगह नहीं रही।
दरगाह झंडा
शरीफ पहुंचने पर सज्जादानशीन और साथियों ने सिर पर गागर लेकर झंडा शरीफ की
परिक्रमा लगाई और तबर्रुक लुटाने की रस्म अदा की गई। इस दौरान धक्कामुक्की
होती रही। यहां कुल व फातिहा से पहले कव्वाली की महफिल सजी और फातिहा पढ़कर
सुख-शांति की दुआ मांगी गई। इस अवसर पर असलम शेर खां, मोहम्मद हसीन, परवेज
अली, नासिर अली, हाजी वारिस अली, दिलदार हुसैन, हाजी इस्लाम अली, फैसल
रईस, अजहर अली, मुतीबुल हसन, हस्सान, काजी मुताहिर अली और हाफिज हारुन आदि
मौजूद रहे।
महिलाओं ने चढ़ाए चिरांगा
दरगाह झंडा शरीफ में
महिलाओं ने मन्नत के सोने व चांदी के चिरांगा चढ़ाए और मुरादें मांगीं। शाम
होते ही शहर व देहात क्षेत्र से महिलाएं हाथ में सजी थालियां लेकर टोलियां
बनाकर झंडा शरीफ पहुंचने लगीं। यहां पहुंचकर महिलाओं ने बड़े साहब की याद
को खिराजे अकीदत पेश की और मुरादें मांगीं। नाजमा अंसारी और निदा खानम ने
बताया कि उन्होंने जो मुरादे मांगी वह पूरी हो गई हैं। इसलिए चिरांगा
चढ़ाने आई हैं।
लगा रहा मेला
जश्ने गौस-ए-आजम के अवसर पर कटरा
बख्शी से लेकर झंडा शरीफ तक मेला लगा रहा। इस दौरान सोने व चांदी के
चिरांगा खूब बिके। बच्चों ने खिलौने तो महिलाओं ने सौंदर्य प्रसाधन का
सामान खरीदा। चांदी के चिरांगा 50 से 100 और सोने के चिरांगा 500 से 700
रुपये तक बिके।
झंडा शरीफ में उमड़ी भीड़
दरगाह झंडा शरीफ में
कुल व फातिहा के वक्त भारी भीड़ उमड़ी। अकीदतमंदों ने मुल्क की खुशहाली की
दुआ मांगी। इसके बाद लंगर का दौर चला। इसी के साथ तीन दिवसीय जश्न का समापन
हो गया। कुल व फातिहा में शिरकत के लिए सुबह से ही महिलाओं और पुरुषों का
आना शुरू हो गया था।
सजी कुरआन ख्वानी की महफिल
हजरत गौसे
आजम बड़े पीर साहब की याद में कई स्थानों पर कुरआन ख्वानी व मीलाद शरीफ की
महफिलें सजाई गईं और मिठाई बांटकर जश्न मनाया गया। रविवार सुबह होते ही
कुरआन ख्वानी का दौर शुरू हो गया। अकीदतमंदों ने कुरआन ख्वानी की। घरों में
मीलाद शरीफ के आयोजन किए। ससमें पैगंबर इस्लाम बड़े पीर साहब के जीवन
उद्देश्यों पर प्रकाश डाला गया।