फोटो -17 सब्जी की दुकान पर बिक्री के लिए रखा नया आलू। संवाद
फर्रुखाबाद। पंजाब में आई बाढ़ का असर इस बार नये आलू पर दिख रहा है। जिले में पंजाब के आलू की आवक न होने से पुराने आलू के भाव में उछाल आया है। इससे शीतगृहों में निकासी भी तेज हो गई है।
एक सप्ताह में पुराने आलू का भाव करीब 400 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ा है। किसान व व्यापारियों को आलू का भाव और बढ़ने की उम्मीद है। जनपद के किसान प्रमुख रूप से आलू की खेती करते हैं। प्रतिवर्ष करीब 42 से 43 हजार हेक्टेयर में आलू की फसल होती है। जिले में संचालित 109 शीतगृहाें में इस वर्ष 7 लाख 79 हजार 685.65 मीट्रिक टन आलू का भंडार किया गया।
भाव में मंदी से अगस्त, सितंबर तक निकासी काफी धीमी रही। इसके बाद गंगा की बाढ़ व बारिश के चलते आलू की बोआई भी देरी से शुरू हुई। अभी तक शीतगृहों से 77.90 फीसदी आलू निकाला गया है। जबकि एक लाख 72 हजार 310.53 मीट्रिक टन आलू अभी भंडार में है।
आलू की बोआई में देरी होने से अगैती फसल भी मंडी में देर से पहुंचने की संभावना है। पूर्व के वर्षों में इन दिनों बाजार में पहाड़ी और पंजाब से नये आलू की आवक बढ़ने लगती थी। इस बार नया आलू भी बाजार में कम दिखाई दे रहा है। इसके पीछे बताया जा रहा है कि पंजाब के कई जनपदों में बाढ़ आने से वहां भी अगैती फसल लेट हो गई।
नेपाल में आलू का निर्यात बढ़ा : आलू निर्यातक सुधीर शुक्ल ने बताया कि नेपाल से चिप्सोना आलू की मांग बढ़ी है। इससे भाव भी बढ़कर 1350 से 1400 रुपये क्विंटल पहुंच गया है। ट्रकों से नेपाल में आलू का लगातार निर्यात हो रहा है।
फोटो -17 सब्जी की दुकान पर बिक्री के लिए रखा नया आलू। संवाद