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एनआरसी में दवा नहीं, भर्ती दस बच्चे भेजे घर

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लोहिया अस्पताल के आईसोलेशन वार्ड का निरीक्षण करतीं सीडीओ। - फोटो : FARRUKHABAD
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एनआरसी में दवा नहीं, 10 बच्चे भेजे घर
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फर्रुखाबाद। कुपोषित बच्चों के इलाज को बना पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) खुद बीमार है। वहां भर्ती 10 बच्चों को दवा के अभाव में घर भेज दिया गया है। एनआरसी वार्ड के प्रभारी डॉ. विवेक सक्सेना ने निरीक्षण करने पहुंचीं सीडीओ के सामने अपनी बात रखी, तो सीएमएस बगलें झांकने लगे। सीडीओ ने नाराजगी जताई, तो शीघ्र ही दवाएं आने का आश्वासन दिया।
मंगलवार को सीडीओ एम. अरून्मोली लोहिया अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंचीं। वह पीकू वार्ड में जानकारी ले रहीं थीं, तभी उन्होंने पीकू वार्ड प्रभारी बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक सक्सेना के बारे में पूछा। डॉक्टर पास में ही थे, मगर सीएमएस ने कह दिया कि वह एनआरसी वार्ड के प्रभारी भी हैं, इसलिए ऊपर चले गए हैं।
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तभी डॉ. सक्सेना पहुंच गए। सीडीओ ने एनआरसी के बारे में पूछा, तो उन्होंने सच बताया कि कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए कोई दवाएं नहीं हैं। इसलिए जो 10 बच्चे भर्ती थे, उनकी भी छुट्टी कर दी गई है। इस पर सीडीओ ने नाराजगी जताई। सीएमएस ने ताया कि ठेकेदार से दवाओं के लिए कह दिया गया है। शीघ्र ही दवाएं आ जाएंगी।
बता दें कि डॉ. राममनोहर लोहिया पुरुष अस्पताल में जिले भर के कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए एनआरसी वार्ड बना है। शासन का निर्देश है कि वार्ड में कुपोषित बच्चों को भर्ती करके स्वस्थ होने तक इलाज किया जाए।
यही नहीं बच्चों के खेलने के लिए खिलौनों की व्यवस्था भी होनी चाहिए, मगर इन दिनों एनआरसी वार्ड खुद बीमार है। कई महीनों से दवाओं का टोटा है। आठ दिन से तो दवा है ही नहीं। वार्ड के प्रभारी डॉ. विवेक सक्सेना ने दवा की मांग संबंधी पत्र कई बार सीएमएस डॉ. राजकुमार गुप्त को लिखा, मगर उन्होंने व्यवस्था करने की जरूरत नहीं समझी।
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वर्जन
‘कुपोषित बच्चों का इलाज बिना दवा के नहीं हो सकता। गंभीर बच्चों के लिए दवाएं कभी पूरी नहीं होतीं। मजबूरी में बाहर से लिखता हूं, तो मेरे लिए दिक्कत है। समझ नहीं आ रहा बच्चों का कैसे इलाज करूं। जब तक दवाएं नहीं आतीं, बच्चों का इलाज संभव नहीं होगा।’
डॉ. विवेक सक्सेना, एनआरसी वार्ड प्रभारी
‘एक ठेकेदार ने दवाई की सप्लाई नहीं की, तो दूसरे से कह दिया गया है। एक-दो दिन में दवाएं आ जाएंगी। कोशिश है कि बच्चों के इलाज में दिक्कत न हो।’
-डॉ. राजकुमार गुप्त, सीएमएस, लोहिया पुरुष अस्पताल।
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