फर्रुखाबाद। जिले के आठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और एक सिविल अस्पताल में मरीजों व प्रसूताओं को बेड तो मिल जाते हैं, पर उस पर चादर नहीं होती हैं। चादरों की धुलाई पर प्रति माह 15 हजार रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
जनपद में सिविल अस्पताल लिंजीगंज, सीएचसी बरौन, कमालगंज, मोहम्मदाबाद, राजेपुर, नवाबगंज, शमसाबाद व कायमगंज में मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जाता है। सीएचसी की सफाई व मरीजों के बेड की चादर धुलाई का प्रत्येक सीएचसी पर 15 हजार रुपये प्रति माह लांड्री का ठेका है। इससे आठ अस्पतालों में लांड्री ठेकेदार को हर माह एक लाख 20 हजार रुपये भुगतान सीएमओ कार्यालय से किया जा रहा है।
अधिकारी जब सीएचसी का निरीक्षण करने पहुंचते तो अक्सर गंदगी मिलने के साथ मरीजों व प्रसूताओं के बेड पर चादर नहीं मिलती हैं। गत सप्ताह सीएमओ ने सीएचसी नवाबगंज का निरीक्षण किया था। उस दौरान तो प्रसूता बिना चादर के फटे गद्दे पर लेटी मिली थीं। स्टोर से हर वर्ष प्रत्येक सीएचसी के लिए चादरों की खरीद भी बड़े स्तर पर होती है। अब सवाल उठता है कि अस्पतालों में चादर ही नहीं हैं, या फिर धुलाई का पैसा मिलीभगत से डकारा जा रहा है।
इससे स्वास्थ्य विभाग से लाखों खर्च के बावजूद मरीजों तक सुविधाएं पहुंच नहीं पा रही हैं। अस्पतालों की सोमवार को अमर उजाला ने पड़ताल की। पड़ताल में भी मरीज बेड पर बिना चादर के ही लेटे मिले। नबावगंज सीएचसी पर महिला मरीज के बेड पर बच्चे लेटे थे। बेड पर चादर नहीं बिछी थी। वहीं, राजेपुर सीएचसी में भी मरीज बिना चादर बिछाए ही बैड पर भर्ती थे। प्रसूताओं और संक्रामक रोगों से ग्रसित मरीजों के बेड पर कोई भी चादर बिछाने वाला नहीं था।
फार्मासिस्ट आलोक कटियार ने बताया कि विगत माह सीएमओ ने निरीक्षण के दौरान प्रसूताओं को नए वार्ड में शिफ्ट करने के निर्देश दिए थे। जल्द ही प्रसूताओं को नए वार्ड में शिफ्ट कराया जाएगा।
सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार ने बताया कि कई बार निरीक्षण के दौरान उन्होंने बिना चादर के बेड पर मरीजों को लेटे देखा। एक ही बहाना बताया जाता कि चादरें धुलने गईं हैं। चादरों की धुलाई पर उन्हें भी शक हो रहा है। वह भुगतान का ऑडिट कराएंगे। हेराफेरी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।