फर्रुखाबाद। विशेष अदालत एंटी डकैती के न्यायाधीश महेंद्र सिंह ने 2006 में कन्नौज जिले के तिर्वा के थानाध्यक्ष रहे रामराज यादव की हत्या में पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। चार पर 50-50 हजार और पांचवें दोषी पर 55 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
रामराज ने 16 सितंबर 2006 को अपहरण के मुकदमे के फरार आरोपी सलीम उर्फ फौजी उर्फ बबलू निवासी
गुरसहायगंज को पकड़ने के लिए शमसाबाद क्षेत्र के गांव कुइयाधीर में दबिश दी थी। थानाध्यक्ष ने बदमाश लोकेंद्र उर्फ टंपू यादव को पकड़कर जमीन पर गिरा लिया, तभी लोकेंद्र ने तमंचा से उनके सीने में गोली मार दी। मुठभेड़ में दरोगा उदयराज और सिपाही गया प्रसाद भी घायल हुए थे। लोकेंद्र मुठभेड़ में मारा गया और अन्य बदमाश भाग गए थे। घायल पुलिसकर्मियों को लोहिया अस्पताल लाया गया। उपचार के दौरान डॉक्टर ने रामराज को मृत घोषित कर दिया।
तिर्वा थाने के सिपाही मुन्ना जबी ने बदमाशों के खिलाफ शमसाबाद थाने में रिपोर्ट कराई थी। पुलिस ने जांच के बाद शमसाबाद क्षेत्र के गांव मुरैठी निवासी राजीव यादव, पप्पू, बबलू उर्फ वीरपाल, सर्वेश, कायमगंज के गांव ज्योता निवासी भीमसेन उर्फ भीमा के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। कायमगंज के गांव अलादादपुर निवासी सुग्रीव के खिलाफ फरारी में आरोप पत्र दाखिल किया गया था। सुग्रीव बाद में मुठभेड़ में मारा गया था।
मामले में 18 गवाहों में से 11 की गवाही कराई गई। बचाव पक्ष के वकील व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता हरनाथ सिंह, केके पांडेय, अखिलेश कुमार, संजीव कुमार ने दलीलें पेश कीं। न्यायाधीश ने सुनवाई के बाद हत्या, हमला, बलवा में सभी को दोषी पाकर सजा और जुर्माने से दंडित किया। इसके बाद सभी दोषियों को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेजा गया। भीमसेन दूसरे मुकदमे में जेल में बंद है, वह उपचार के लिए केजीएमयू लखनऊ में भर्ती है। इससे कोर्ट में उपस्थित नहीं हो पाया।