किशोरी का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में न्यायालय ने आरोपी को दस वर्ष का कारवास व 30 हजार जुर्माने की सजा सुनाई है। साथ ही जुर्माने की आधी धनराशि पीड़िता को देने के निर्देश दिए हैं। ये फैसला 12 साल बाद आया है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता शैलेष स्वरूप चौरसिया ने बताया कि बिवांर थानाक्षेत्र के एक गांव में पिछले नौ मार्च 2005 की रात किशोरी अपने घर पर सो रही थी। वहीं करीब 11 बजे उसके पिता की आंख खुलने पर उसने बेटी को घर में न पाकर उसकी तलाश की।
तब पता चला कि ट्रैक्टर ड्राइवर भगत सिंह पुत्र शंभू लोधी निवासी महेरा उसी गांव के अपने दो साथियों राजेंद्र व रविकरन के सहयोग से उसकी बेटी का अपहरण कर ले गए हैं। 18 अप्रैल 2005 को तीनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। चार जून 2005 को भगत सिंह के कब्जे से पीड़िता को छुड़ाया।
वहीं पीड़िता के बयानों के आधार पर पुलिस ने भगत सिंह व राजेंद्र के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की। राजेंद्र के नाबालिग होने पर उसका मामला जुवेनाइल कोर्ट में चला गया।
वहीं अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम शैलोज चंद्रा ने आरोपी भगत सिंह को मामले में दोषी मानते हुए 10वर्ष का कारावास व 30 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। साथ ही जुर्माने की आधी धनराशि पीड़िता को दिए जाने के निर्देश दिए हैं।