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मिल चलवाने की मांग पर मिला सिर्फ आश्वासन

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कंपिल स्थित कताई मिल का बंद गेट। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
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कंपिल। कटरी क्षेत्र के लोगों को रोजगार देने के लिए लगाई गई एक मात्र औद्योगिक इकाई सहकारी कताई मिल 22 वर्ष से बंद है। मिल को चालू करने की मांग पर नेताओं ने सिर्फ वादे किए हैं। मिल बंद होने से बेरोजगार हुए 1200 श्रमिकों को रोजगार देने के लिए कोई दूसरा उद्योग भी स्थापित नहीं हुआ। श्रमिकों का बकाया वेतन, बोनस, फंड आदि का मिल पर 10 करोड़ रुपये से अधिक बकाया है। विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही फिर श्रमिकों को नेताओं से उम्मीदें जगी हैं।
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पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने 1985 एकड़ भूमि पर बनी मिल की 1983 में आधारशिला रखी थी। वर्ष 1986 में मिल चालू होने से कस्बा सहित क्षेत्र के एक हजार लोगों को रोजगार मिला था। शुरुआत के साथ ही सहकारिता क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार की दीमक लग गई। पहले वर्ष से ही करीब साढ़े तीन करोड़ का औसतन घाटा होने के साथ 13 वर्ष में मिल करीब 40 करोड़ रुपये के घाटे में पहुंच गई थी।
जो धीरे-धीरे 80 करोड़ पार कर गया। वर्ष 2000 में मिल पूरी तरह बंद हो गई। इसके बाद मिल के बर्खास्त कर्मचारियों व क्षेत्रीय लोगों ने मिल चालू कराने के कई बार प्रयास किए। हर बार चुनाव में नेताओं ने भरोसा दिया। पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने भी प्रयास किए, लेकिन हुआ कुछ नहीं। मिल को जॉब वर्क, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप पर चलाने के प्रयास परवान नहीं चढ़ सके।
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मिल परिसर में चारों ओर झाड़ियां हैं। बंद पड़ी मशीनें व उपकरण कबाड़ हो गए हैं। सरकारी आवासों के दरवाजे, जंगले सहित कीमती सामान चोरी हो चुका है। मिल की करीब 200 बीघा भूमि को लीज पर देकर गार्ड आदि का खर्च चलाया जा रहा है।
श्रमिकों की संघर्ष समिति के अध्यक्ष विनोद शुक्ला ने बताया कि वर्ष 2007 में श्रमिकों का वीआरएस हो गया था। पांच वर्ष तक काम करने वाले श्रमिकों को ग्रेच्युटी देने का निर्णय हुआ था लेकिन 800 को ही वीआरएस मिला। 250 को ग्रेच्युटी दी गई। 100 से अधिक श्रमिकों को कोई भत्ता नहीं मिला। फेडरेशन ने कंपिल कताई मिल का पीएफ भी जमा नहीं किया। इससे श्रमिकों का बकाया वेतन, बोनस सहित अन्य मदों में करीब 10 करोड़ बकाया है।
कंपिल निवासी साबिर अली ने बताया कि क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने के लिए मिल की स्थापना की गई थी। फर्रुखाबाद जिला आलू उत्पादन का प्रमुख क्षेत्र है। बंद पड़ी मिल में आलू आधारित उद्योग लगाया जा सकता है। इससे लोगों को रोजगार तो मिलेगा ही। किसानों को भी फायदा होगा।
मोहल्ला चौधरियान निवासी प्रेम यादव ने बताया कि कंपिल व आसपास के 100 गांवों के लोगों को अपनी फसल व सब्जी को लेकर कायमगंज की मंडी तक जाना पड़ता है। मिल में मंडी बनाने से रोजगार के साथ किसानों को भी फायदा होगा। बस स्टैंड भी बनाया जा सकता है।
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