कमालगंज। समाजवादी चिंतक डॉ. राम मनोहर लोहिया के चुनाव में कई प्रांतों से समाजवादी कार्यकर्ता प्रचार के लिए जिले में आए थे। उनकी सादगी से लोग बहुत प्रभावित हुए। वह खाने के लिए लइया, चना, गुड़ आदि अपनी जेब में रखते थे। कुछ कार्यकर्ता कंधे पर लटकाने वाला लाउडस्पीकर टांगकर दिन भर पैदल घूमते हुए प्रचार करते थे।
97 वर्षीय पूर्व चेयरमैन गोपीराम शंखवार ने बताया कि कांग्रेस सांसद मूलचंद दुबे के निधन के बाद साल 1963 में जिले में उपचुनाव हुआ। संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से समाजवादी नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया चुनाव लड़े थे। कांग्रेस उम्मीदवार बीके केशकर थे। लोहिया बाहरी प्रत्याशी थे। कई प्रांतों से आए उनके समर्थकों ने जिले में जमकर प्रचार किया। कई महिला समर्थक भी आईं थीं। ये कार्यकर्ता पैदल गांव-गांव घूमते थे। कुर्ते की जेब में खाने का सामान रखते थे।
दिन भर प्रचार करते और रात होने पर गांव में ही सो जाते थे। सुबह फिर उठकर आगे की यात्रा के लिए रवाना होते थे। प्रत्याशी राममनोहर लोहिया बैलगाड़ी व तांगे पर बैठकर भी घूमे थे। वह भी पूरी सादगी के साथ चुनाव लड़े थे। करीब 57 हजार मतों से उन्हें जीत मिली थी।