फर्रुखाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे एक डायरिया पीड़ित मासूम को कर्मचारी वीगो नहीं लगा सके। ईएमओ ने बालरोग विशेषज्ञ को फोन किया, मगर देखने की बजाय फोन पर ही रेफर करने की सलाह दे दी। आखिरकार सैफई ले जाते समय बच्चे की सांसें थम ही गईं।
मेरापुर थाने के गांव गनेशपुर निवासी रामकिशोर यादव के आठ माह के बेटे राघव को डायरिया हो गया। रामकिशोर पत्नी नेमा व मां शांति देवी के साथ मंगलवार रात करीब सवा आठ बजे लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी लेकर पहुंचे। कर्मी करीब डेढ़ घंटे तक इलाज शुरू करने के लिए वीगो लगाने का प्रयास करते रहे, मगर असफल रहे।
बच्चे को पीकू वार्ड में भेजा गया, मगर वहां भी सफलता नहीं मिली। दोबारा उसे इमरजेंसी लाया गया। मासूम की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। ईएमओ डॉ. अभय श्रीवास्तव ने बाल रोग विशेषज्ञ को फोन करके बच्चे को देखने के लिए कहा। बाल रोग विशेषज्ञ अस्पताल ने आने की बजाय फोन पर ही हालात पूछकर रेफर की सलाह दे दी।
ईएमओ ने बच्चे को रेफर कर दिया। रामकिशोर ने एएलएस एंबुलेंस को फोन किया, तो वह नहीं मिली। इसके बाद 108 की एंबुलेंस रात करीब पौने 11 बजे बच्चे को लेकर सैफई के लिए लेकर रवाना हुई। रात 11:50 बजे सौरिख के पास बच्चे की सांसें थम गईं। रामकिशोर का कहना है कि यदि वीगो न लगने के कारण ही मासूम की जान चली गई। उनके दो बेटियों के बाद राघव ने जन्म लिया था।
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हमारे अस्पताल में लेकर चलो बच्चा, हो जाएगा इलाज
करीब पौन घंटे तक इमरजेंसी का स्टाफ वीगो नहीं लगा सका, तो एक प्रशिक्षु छात्र ने बाहरी युवक को बुलाया। उसने बच्चे को देखा। वीगो लगाने की बजाय मासूम के पिता को बाहर आने की बात कही। पिता राम किशोर ने बताया कि उस युवक ने बाहर जाकर कहा कि उनका अस्पताल है। उसमें लेकर चले तो पूरा इलाज हो जाएगा। इससे साफ हो गया कि इमरजेंसी में काम करने वाले कर्मी ही सेटिंग वाले अस्पतालों में मरीजों को भेजने में सहयोग करते हैं।
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बच्चे के वीगो न लग पाने की उनके पास कोई सूचना नहीं है। यदि कॉल करने पर भी डॉक्टर नहीं गए, तो इस मामले की वह जांच कराएंगे। बच्चे को क्यों वीगो नहीं लग सकी, इसकी भी जानकारी की जाएगी।
- डॉ. अशोक प्रियदर्शी, सीएमएस, लोहिया जिला अस्पताल