शासन के आदेश पर एमडीएम योजना के तहत शुरू हुई दूध वितरण योजना में बच्चों
को दूध के नाम पर सफेद मीठा पानी दिया जा रहा है। दूध में पानी अधिक मिला
कर मीठा कर दिया जाता है। यह भी दो-दो सौ ग्राम के बजाय 100-100 ग्राम दिया
जाता है। इस कारण दूध पीने की इच्छा भू बच्चों के दिलों से खत्म होने लगी
है। इस योजना को सफल बनाने में विभागीय अफसर भी दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं।
एमडीएम
के तहत प्रत्येक बुधवार को स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को दो सौ ग्राम
दूध और कोफ्ता चावल दिए जाने की योजना शुरू हुई है। इसके तहत बच्चों को
पानी अधिक मिलाकर दूध दिया जा रहा है। शहरी क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय
बढ़पुर में 140 बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें बुधवार को 104 उपस्थित हुए। इनको
पनीले दूध का वितरण किया गया।
अमृतपुर प्रतिनिधि के अनुसार प्राथमिक
विद्यालय गूजरपुर गहलवार में 111 बच्चों में से 53 उपस्थित हुए। यहां
बच्चों को दूध नहीं दिया गया। सहायक अध्यापक गोविंद अग्निहोत्री ने बताया
कि दूध की व्यवस्था नहीं हो पाई थी। प्राथमिक विद्यालय परतापुर कलां में 88
में से 58 बच्चे उपस्थित हुए। यहां चार लीटर दूध मंगाया गया । इसमें पानी
मिलाक र बांट
दिया गया। प्रधानाध्यापक नरेंद्र सिंह का कहना है कि दूध के
लिए अलग से कोई बजट नहीं आता है। इस कारण वितरण में दिक्कत होती है।
प्राथमिक विद्यालय किराचन में 164 में से 90 बच्चे उपस्थित हुए। जूनियर
हाईस्कूल किराचन में 55 में से 16 बच्चे आए। इन दोनों स्कूलों में बच्चों
को नाममात्र दूध का वितरण किया गया। बच्चों ने बताया कि दूध नहीं सफेद मीठा
पानी पीने को दिया जाता है।
शमसाबाद प्रतिनिधि के अनुसार प्राथमिक
विद्यालय पपियापुर में 192 में से 137 बच्चे उपस्थित हुए। यहां 12 लीटर दूध
मंगाकर बच्चों को वितरित किया गया। प्राथमिक विद्यालय कुइयासंत में 75 में
से 55 बच्चे स्कूल आए। इनके लिए सिर्फ पांच लीटर दूध ही मंगाया गया।
प्राथमिक विद्यालय मुजफ्फर पट्टिया में 96 में से 80 बच्चे उपस्थित हुए।
इनके लिए 12 लीटर ही दूध मंगाया गया।
कमालगंज प्रतिनिधि के अनुसार
पूर्व माध्यमिक विद्यालय मोहनपुर में 40 में से 32 बच्चे और पूर्व माध्यमिक
विद्यालय नरायनपुर गढ़िया में 122 में से 67 बच्चे उपस्थित हुए। इनको दूध
का वितरण किया गया। खंड शिक्षा अधिकारी बेगीश गोयल ने बताया कि दूध का
वितरण प्रत्येक विद्यालय में प्रधानाध्यापक को करना होगा। अगर दूध का वितरण
नहीं किया
जाता है तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। खंड शिक्षा अधिकारी सुमित
वर्मा ने बताया कि शासन के आदेश पर दूध का वितरण मानक के अनुरूप करना है।
अगर दूध कम मात्रा में वितरित किया जाता है तो उस विद्यालय के
प्रधानाध्यापक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।