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Farrukhabad News: मौसम व मंदी की मार... आलू निकासी की नहीं बढ़ी रफ्तार

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फर्रुखाबाद। आलू की बोआई शुरू होने के बावजूद मौसम व मंदी की मार से आलू की निकासी रफ्तार नहीं पकड़ सकी। शीतगृहों में अब भी 53 फीसदी आलू भंडारित है। गत वर्ष के सापेक्ष इस बार करीब 15 फीसदी आलू की निकासी कम होने से शीतगृह संचालक भी चिंतित हैं। मंदी के चलते किसान परेशान हैं, वहीं व्यापारियों को भी घाटा उठाना पड़ रहा है।
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आलू भंडारण के लिए 121 शीतगृह संचालित हैं, इनमें 11.48 लाख मीट्रिक टन भंडारण क्षमता है। इसके सापेक्ष 9 लाख 72 हजार 814.84 मीट्रिक टन आलू भंडारित किया गया। इस वर्ष शुरुआती सीजन से लेकर अब तक आलू मंदी से नहीं उबर पाया। इससे शीतगृहों से आलू की निकासी रफ्तार ही नहीं पकड़ सकी।
आलू की बोआई के दौरान हर वर्ष निकासी भी तेजी से होने लगती थी। लेकिन इस बार जब आलू की बोआई शुरू हुई तो दो बार की बारिश ने ब्रेक लगा दिया। इससे शीतगृहों से आलू निकासी की रफ्तार थम गई। उधर, शासन से शीतगृहों से आलू की निकासी की तिथि 31 अक्तूबर निर्धारित है, इसमें 20 दिन ही शेष है। जबकि शीतगृहों से अब तक मात्र 4.62 लाख मीट्रिक टन आलू की निकासी हुई है। मंडी में 400 से 500 रुपये प्रति क्विंटल आलू बिकने से किसान व व्यापारियों का भंडारण खर्च ही निकल पा रहा है। किसानों की लागत और व्यापारियों की पूंजी डूबने से वह बर्बाद हो रहे हैं।
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काफी आलू फेंके जाने की दिख रही आशंकाआलू निर्यातक सुधीर शुक्ला ने बताया कि नेपाल के लिए एक माह में औसतन 10 ट्रक आलू निर्यात होता है। हालैंड, चिप्सोना की मांग अधिक है। मंडी शुल्क माफ होने पर निर्यात को और बढ़ावा मिल सकता है। आलू आढ़ती सुधीर वर्मा ने बताया कि बिहार व झारखंड में बंगाल का आलू जा रहा है, इससे जिले में आलू की मांग नहीं आ रही है। यही हालात रहे तो कुल भंडार का करीब 15 फीसदी आलू फेंके जाने की आशंका दिख रही है।

घाटा पूरा करने के लिए करेंगे सरसों व मक्का की खेती
मोहम्मदाबाद क्षेत्र के किसान पवन अग्निहोत्री ने बताया कि उन्होंने 1000 पैकेट (बोरी) आलू भंडारित किया था। भाव की मंदी के चलते अभी तक आलू शीतगृह से नहीं निकाला। आलू की बोआई का समय आ गया है, लेकिन खाद खरीदने के लिए लागत का इंतजाम नहीं है। इससे इस बार आलू की जगह सरसों की बोआई करेंगे। सरसों व मक्का की खेती कर आलू का घाटा पूरा करेंगे।
डेढ़ गुना रकबा बढ़ाकर फिर उगाएंगे आलू
आलू किसान कल्लू गुप्ता ने बताया कि इस बार 42 बीघा आलू की फसल थी। 2600 पैकेट आलू का उत्पादन हुआ था। अब तक 1800 पैकेट बेचे हैं। 180 रुपये पैकेट के हिसाब से बिकने से दो लाख 80 हजार रुपये का घाटा हुआ। 800 पैकेट अभी शीतगृह में है। आलू का घाटा आलू से ही पूरा होगा। इस बार वह 68 बीघा में आलू की फसल करेंगे। इस वर्ष आलू महंगा रहने की उम्मीद है। आलू के बाद मक्का की फसल बोकर घाटा पूरा करेंगे।


जिला आलू विकास एवं शाकभाजी अधिकारी राघवेंद्र सिंह ने बताया कि अब आलू की बोआई का समय आया है, इससे निकासी भी बढ़ेगी। हालांकि गत वर्ष से इस बार निकासी कम है। बोआई में तेजी आने के साथ निकासी भी तेज होगी।
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