फोटो-33, लोहिया अस्पताल में गोली लगने के बाद भर्ती घायल गजेंद्र सिंह। (संवाद)
फर्रुखाबाद। इलाज कराने के लिए कुछ महीने पहले बेची जमीन के रुपये लेने का दबाव न मानने पर पौत्र ने साधु वेश में रह रहे अपने बाबा की आश्रम में गोली मारकर हत्या कर दी। बाबा के कंधे की गोली आरपार हो गई, जबकि कमर के पास पेट में लगी गोली अंदर ही फंसी थी। घटना के बाद सीओ मोहम्मदाबाद ने मौके पर जांच पड़ताल की।
थाना जहानगंज क्षेत्र के गांव रतनपुर निवासी गजेंद्र सिंह (65) पीले वस्त्र धारण कर संत वेश में गांव के पास ही आश्रम बनाकर रह रहे हैं। शाम करीब चार बजे आश्रम में पहुंचे उनके पौत्र ने विवाद शुरू कर दिया। गाली-गलौज का गजेंद्र सिंह ने विरोध किया, तो उसने तमंचे से गोली चला दी। गोली उनके पेट के निचले हिस्से में लगी। जान बचाने के लिए गजेंद्र सिंह कमरे की ओर भागे, तो उसने एक गोली पीछे से चला दी। वह गोली कंधे के पास लगकर सीने की ओर आगे निकल गई। गोली की आवाज सुनकर गांव के लोग भागे, तो आरोपी तमंचा लहराता हुआ मौके से भाग गया।
सूचना पर गांव पहुंचे सिपाही विकल कुमार और छोटे पौत्र शिवा ने लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया। गंभीर रूप से घायल गजेंद्र सिंह ने बताया कि वह डेढ़ साल से बीमार चल रहे हैं। इलाज कराने के लिए उन्होंने कुछ महीने पहले खेत बेचा था। उनका पौत्र रकम को जबरन लेना चाहता था। रविवार शाम जब रुपये देने से इनकार किया, तो उसने तमंचे से दो गोलियां मार दीं। हालत गंभीर देख इमरजेंसी प्रभारी डॉ. अभिषेक चतुर्वेदी ने रेफर कर दिया। थाना पुलिस ने अस्पताल में गजेंद्र सिंह के बयान दर्ज किए। घटना की सूचना मिलते ही सीओ मोहम्मदाबाद आलोक कुमार सिंह ने घटनास्थल का जायजा लेकर आसपास लोगों से जानकारी ली। उन्होंने थाना पुलिस को शीघ्र ही आरोपी को गिरफ्तार करने के निर्देश दिए। सीओ ने बताया कि जमीन के विवाद में पौत्र ने अपने ही बाबा को गोली मार दी है। घटना को अंजाम देकर आरोपी भाग गया है। बाबा को इलाज के लिए तिर्वा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। वहां देर रात इलाज के दौरान बाबा ने दम तोड़ दिया। जहानगंज के प्रभारी थानाध्यक्ष राकेश कुमार सिंह ने बताया कि तिर्वा मेडिकल कॉलेज में बाबा गजेंद्र की मौत हो गई है। आरोपी को पकड़ने के लिए दबिश दी जा रही है।
फोटो-33, लोहिया अस्पताल में गोली लगने के बाद भर्ती घायल गजेंद्र सिंह। (संवाद)
फोटो-33, लोहिया अस्पताल में गोली लगने के बाद भर्ती घायल गजेंद्र सिंह। (संवाद)