फर्रुखाबाद। एनएकेपी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में ‘महात्मा गांधी: व्यक्ति, विचार व दर्शन’ विषय पर दो दिनी संगोष्ठी का समापन हो गया। दूसरे दिन तकनीकी सत्र में वक्ताओं ने कहा कि गांधीजी अर्थशास्त्री न होते हुए भी उन्होंने देश को अर्थशास्त्र के मूल्यों पर आधारित शिक्षा, स्वरोजगार, लघु उद्योगों एवं ट्रस्टीशिप पर जोर दिया था।
महाविद्यालय में हुई गोष्ठी का रविवार को शुभारंभ डीएन कालेज हिंदी विभागाध्यक्ष मुख्य अतिथि डा. राजकुमार सिंह, विशिष्ट अतिथि डा. माधुरी दुबे, डा. कमला तिवारी, डा. वीके गुप्ता, डा. शशिकिरण सिंह, गोष्ठी समन्वयक डा. पारुल मिश्रा एवं श्रुति गुप्ता ने मां शारदे के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। संगीत प्रवक्ता डा. अंजू पांडेय, दिव्यांशी की देखरेख में छात्राओं ने वंदना तथा स्वागत गीत प्रस्तुत किया।
अरविंद पांडेय, अमित चतुर्वेदी ने अतिथियों का माल्यार्पण किया। एमए की छात्रा निधि यादव, शिल्पी, अनमोल वर्मा, रिमझिम, छवि वर्मा ने विचार व्यक्त किए। प्रवक्ता दिव्यांशी ने कहा कि यदि मानव उत्थान कराना है, तो पूरे राष्ट्र की शिक्षा व्यवस्था में सक्रिय सकारात्माक प्रयोग करने होंगे। प्रवक्ता डा. हर्षबाला, डा. अंजू पांडेय ने भजन सुनाए।
विशिष्ट अतिथि डा.कमला तिवारी ने कहा कि गांधीजी अभाव व अति नैतिकता के विरोधी थे। वह मध्यम मार्ग को नैतिकता का आधार मानते थे। डा. माधुरी दुबे, डा. राजेश हजेला, डा. वीके गुप्ता ने भी विचार व्यक्त किए। समापन सत्र का शुभारंभ मुख्य अति थि बद्री विशाल कालेज के प्राचार्य डा. शरद चंद्र मिश्रा के स्वागत से हुआ। डा. पारुल मिश्रा ने समीक्षा प्रस्तुत की।
संगोष्ठी में प्रवक्ता डा. सुमन, अनुपम मिश्रा, विनीता दीक्षित, डा. रंजना चतुर्वेदी, रेशू शाक्य, लिपिक संदीप दीक्षित, राहुल मिश्रा, राजीव, अतिम कटियार समेत स्टाफ राजेश, कमलेश सुखदेव, आकाश, मोहन, रामवती, मुन्नी, नीरज, राजेंद्र का सहयोग रहा।
‘गांधी जी के विचारों को आत्मसात करने की जरूरत’
कायमगंज। विद्या मंदिर डिग्री कालेज में हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी में रविवार को वक्ताओं ने कहा कि गांधी के विचारों को समझने के लिए हमें इस बात को मानना होगा कि वे युगीन थे। वर्तमान में उनके विचारों को आत्मसात करने की जरूरत है। उनका कहना था किसी देश को नष्ट करना है तो उसकी भाषा व संस्कार दोनों नष्ट कर दें।
महात्मा गांधी का आर्थिक एवं सामाजिक चिंतन प्रासंगिकता एवं सातत्य विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी गांधी अध्ययन केंद्र की ओर से हुई। समापन सत्र में डीएन कालेज फतेहगढ़ के प्राचार्य डॉ मुकेश सिंह राठौर ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम शुरू किया। उन्होंने ग्रामोदय और स्वदेशी आंदोलनों के बारे में छात्र छात्राओं को अवगत कराया।
एल वाई डिग्री कालेज के प्रो. डॉ आरके राजौरिया ने गांधी जी के सर्वोदय सिद्धांत एवं वर्तमान परिदृश्य में उनकी प्रासंगिकता पर व्याख्यान दिया। डीएन कालेज के डॉ वीके तिवारी ने कहा गांधी जी के आर्थिक दर्शन एवं उनके ट्रस्टीशिप सिद्धांत पर प्रकाश डाला। सेवानिवृत्त प्रो. पीएस अवस्थी ने गांधी दर्शन एवं उनके मूल सिद्धांतों के बारे में बताया।
बद्री विशाल कालेज के प्रो. डॉ रुद्र नारायन त्रिपाठी ने गांधी जी के आध्यात्मिक एवं सामाजिक दर्शन के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम समापन पर कालेज के विजेता छात्र छात्राओं को प्रमाण पत्र व ट्राफी दी गई। कालेज के प्राचार्य डॉ श्याम मिश्रा, कुलदीप आर्य, डॉ पूजा सिंह, विनायक तिवारी, मनोज वर्मा, सुशील तिर्पाठी, अभिषेक गुप्ता, पूजा गोयल, ऐश्वर्या गंगवार, अम्बिका रस्तोगी, सुखदेव आदि मौजूद रहे।