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ढूंढे नहीं मिले साहब, आरोपपत्र पहुंचा नलकूप विभाग

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फर्रुखाबाद। नलकूप विभाग की जांच में फंसे तत्कालीन अधिशासी अभियंता अपने स्थायी पते पर नहीं मिले। इससे शासन से भेजा गया आरोपपत्र रिसीव न होने से नलकूप विभाग को भेजा गया है। अधिशासी अभियंता दो वर्ष पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
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नलकूप विभाग में होने वाले कार्यों में टेंडर प्रक्रिया को धता बताकर चहेते ठेकेदारों को काम देने की रीति है। वर्ष 2019 में शिकायत पर तत्कालीन सीडीओ ने नलकूप विभाग की जांच कराई तो भ्रष्टाचार की कलई ही खुल गई थी। जिम्मेदारों ने टेंडर से बचने के लिए लाखों के काम टुकड़ों में बांट कर वर्कआर्डर चहेते ठेकेदारों को दे दिए। कई वर्कआर्डरों पर फर्जी भुगतान का भी मामला मिला था।
जांच में मामला फंसने के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने कार्रवाई के लिए जांच पत्रावली शासन को भेज दी थी। इस जांच में तत्कालीन अधिशासी अभियंता, जेई, सहायक अभियंता, कैशियर सहित कर्मचारी भी फंसे थे। जनवरी 2020 में अधिशासी अभियंता रणधीर सिंह सेवानिवृत्त हो गए थे।
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उसी जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन से जारी आरोपपत्र तत्कालीन अधिशासी अभियंता रणधीर सिंह को उनके स्थायी पते जनपद फतेहपुर के गांव हसनापुर भेजा गया। लेकिन वह वहां नहीं मिले। इसके बाद नलकूप खंड के कर्मचारी को भेजकर आरोपपत्र रिसीव कराने का प्रयास किया गया, लेकिन साहब फिर नहीं मिले।
तत्कालीन अधिशासी अभियंता के न मिलने पर आखिरकार आरोपपत्र फिर नलकूप खंड कार्यालय भेज दिया गया। अधिशासी अभियंता अनिल सिंह ने बताया कि डाक से सीलबंद आरोप पत्र कार्यालय में प्राप्त हुआ है। तत्कालीन अधिशासी अभियंता के आने पर उन्हें रिसीव करा दिया जाएगा। 10 दिन के अंदर आरोप पत्र तत्कालीन अधिशासी अभियंता रिसीव नहीं करते हैं, तो आरोपों को सही मान कर शासन कार्रवाई कर देगा।
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