रोडवेज बसों का पांच घंटे चक्काजाम, नारेबाजी
फर्रुखाबाद। शासन के निर्देश के बावजूद बसों की धुलाई, सफाई और सैनिटाइजेशन न होने, मानदेय में कटौती, रेस्ट न देने आदि के विरोध में संविदा चालक-परिचालक सोमवार को लामबंद हो गए। उन्होंने पांच घंटे तक बसें नहीं निकालीं। गेट पर ही विरोध-प्रदर्शन किया। कहा, न एआरएम फोन उठा रहे और न ही डिपो इंचार्ज। बिना सैनिटाइजेशन के बसों से उनको संक्रमण का खतरा है। डिपो इंचार्ज के समझाने के बाद साढ़े 11 बजे बसों का संचालन शुरू हो सका।
कोरोना संक्रमण से यात्रियों को बचाने के लिए बसों को बिना सफाई, सैनिटाइजेशन के कार्यशाला से न निकालने के निर्देश हैं। लखनऊ की बस सुबह छह बजे निकलती है। इसके बाद आगरा, हरदोई, शाहजहांपुर, बरेली, कानपुर आदि रूटों की बसें जाती हैं। सोमवार सुबह चालक-परिचालक अपने समय पर पहुंचे, तो वर्कशॉप में गाड़ियों में झाड़ूू तक नहीं लगी थी।
संविदा कर्मचारी यूनियन अध्यक्ष जयनरायन त्रिवेदी को बस लेकर लखनऊ जाना था। उन्होंने डिपो इंचार्ज गौरीशंकर और एआरएम को फोन किया, मगर रिसीव नहीं हुआ। इससे 12 से अधिक बसों के चालक-परिचालक एकत्र होकर विरोध करने लगे। जमकर नारेबाजी की। कहा कि संविदा कर्मियों संग अन्याय हो रहा है। मानदेय में कटौती की जा रही है। रेस्ट भी नहीं दिया जा रहा। सुरक्षा के कोई साधन नहीं हैं। गाड़ियां सैनिटाइज तक नहीं होतीं।
सैनिटाइजर की छोटी सी शीशी दी जाती है जो शाम को ले ली जाती है। अगले दिन मिलती तक नहीं है। मास्क भी ऐसे, जो काम तक नहीं करते। ऐसे में हम लोगों के जीवन को खतरा हो गया है। उधर, नौ बजे वर्कशाप कर्मचारी पहुंचे, तब धुलाई शुरू हुई। साढ़े 10 बजे डिपो इंचार्ज गौरीशंकर ने पहुंचकर संविदा चालक-परिचालकों से वार्ता की।
उन्हें समस्या का समाधान कराने का आश्वासन दिया। 11 बजे के बाद ही गाड़ियों का निकलना शुरू हुआ। इस दौरान पांच घंटे तक बसें न चलने से यात्री भी परेशान रहे। यूनियन अध्यक्ष जयनरायन त्रिवेदी नेे बताया कि चालक-परिचालकों की दिक्कतों को समझा जाए।
हरदोई तक ही भेजी गई लखनऊ की बस
लखनऊ के लिए बस सुबह सात बजे बस स्टैंड से निकल जाती थी मगर 12 बजे निकल सकी। इससे उसे हरदोई तक ही भेजा गया। इससे लखनऊ जाने वाले यात्रियों को दिक्कत उठानी पड़ी।
‘बसों में देर से धुलाई शुरू हो सकी थी। इसलिए दिक्कत हुई। वर्कशाप स्टाफ को निर्देश दे दिए हैं कि सुबह समय से बसों की धुलाई हो जाए। अन्य समस्या के समाधान को उच्चाधिकारी ही कुछ कर सकेंगे। बसें संचालित हो रही हैं।’ -गौरीशंकर, डिपो इंचार्ज।