वरिष्ठ अधिवक्ता आशुतोष बाजपेई पर आपदाओं का पहाड़ दो साल पहले भी टूट चुका है। इस बार शार्ट सर्किट से चेंबर में लगी आग से पत्नी और मां की मौत ने अधिवक्ता को पूरी तरह से झकझोर दिया है। यूं कहें तो दो साल में अधिवक्ता का घर पूरी तरह उजड़ गया है। बेटी की शादी होने से वह चेन्नई में है।
शहर कोतवाली के मोहल्ला नया कोठापार्चा निवासी अधिवक्ता आशुतोष बाजपेई के इकलौते पुत्र पीयूष बाजपेई की19 अक्तूबर 2014 को इनवर्टर में करंट आने से उससे चिपककर मौत हो गई थी। बेटे की मौत का सदमा अधिवक्ता भूल नहीं पाए थे कि फिर उनके ऊपर दुखों की गाज गिर गई। सोमवार की रात शार्ट सर्किट से लगी आग ने उनका सब कुछ जलाकर राख कर दिया।
बुढ़ापे की संगिनी पत्नी अंजना आग में जिंदा जल गईं और मां गंभीर रूप से झुलस गईं। झुलसी मां को बचाने के लिए अधिवक्ता ने आनन-फानन में उन्हें लोहिया अस्पताल भिजवाया लेकिन 90 फीसदी जलीं उनकी मां रामचहेती को डाक्टर ने कानपुर के लिए रेफर कर दिया।
कानपुर के हैलट अस्पताल में कुछ ही क्षण उपचार के बाद अधिवक्ता की मां ने भी दम तोड़ दिया। इससे उन्हें गहरा सदमा लगा है। अधिवक्ता के घर सास-बहू की मौत की खबर सुनकर दूरदराज के लोग वहां पहुंच रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ इकलौता पुत्र मरने के बाद पत्नी का ही सहारा शेष बचा था।
पत्नी भी इस हादसे में चल बसी। अब अधिवक्ता के केवल एक बेटी प्रज्ञा है, जिसकी वह चेन्नई में शादी कर चुके हैं। अधिवक्ता आशुतोष बाजपेई पूरी तरह से अकेले पड़ गए हैं।