लोहिया अस्पताल के पीकू वार्ड में भर्ती बच्चे। संवाद
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फर्रुखाबाद। बच्चों को डायरिया तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है। रोजाना दो-चार बच्चे पीकू वार्ड में भर्ती किए जा रहे हैं। काम से बचने के लिए यहां के कर्मचारी सेटिंग करके अन्य विभागों में ड्यूटी कर रहे हैं। यही नहीं एक कर्मचारी एक महीना और दूसरा 25 दिन से बिना सूचना के गैरहाजिर चल रहा है। मरीजों की संख्या बढ़ने पर भी पीकू वार्ड में कर्मचारियों की कमी बनी हुई है।
कोरोना की दूसरी लहर के बाद बच्चों के इलाज के लिए लोहिया पुुरुष अस्पताल में 40 बेड का पीकू वार्ड बनाया गया है। इसमें दो बालरोग विशेषज्ञ तैनात हैं। यही नहीं पीकू वार्ड की व्यवस्था चाकचौबंद रखने के लिए शासन ने अलग से स्टाफ नियुक्त किया था।
कुछ पहुंच वाले कर्मचारियों ने अपनी सेटिंग के हिसाब से अन्य विभागों में ड्यूटी लगवा ली है। यही वजह है कि पीकू वार्ड में भर्ती मरीजों को सभी स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। रविवार को वार्ड में भर्ती पांच बच्चों का इलाज चल रहा है।
वार्ड ब्वाय मिलन कुमार 27 मार्च और रामलखन एक अप्रैल से ड्यूटी पर नहीं लौटे। एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने आरटीपीसीआर लैब में ड्यूटी लगवा ली, जबकि वार्ड आया रेशमा ने कम काम होने की वजह से एचआईवी विभाग में ड्यूटी लगवा ली।
यही नहीं वार्ड ब्वाय आशीष नेत्र विभाग में ड्यूटी कर रहे हैं। पीकू वार्ड से छह कर्मचारियों के न आने से यहां भर्ती बच्चों के परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ड्यूटी चार्ट बनाने में जिम्मेदारों की मनमानी
शनिवार को ड्यूटी चार्ज जारी किया गया। इसके अनुसार ऑक्सीजन प्लांट के कर्मचारी तीन घंटे प्लांट पर ड्यूटी करेंगे और तीन घंटे इमरजेंसी बच्चा वार्ड अथवा पीकू में। ड्यूटी के दौरान प्लांट में खराबी अथवा बंद होने पर भर्ती मरीजों के जीवन पर संकट खड़ा हो जाएगा। सवाल उठता है कि एक कर्मचारी का अवकाश है, तो ऑक्सीजन प्लांट तीन घंटे बंद ही रहेगा। शासन के निर्देश हैं कि ऑक्सीजन प्लांट में तीनों शिफ्टों में दो-दो कर्मचारी ड्यूटी करेंगे।