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गेहूं का उत्पादन घटने से मंडी में भी आमद कम

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कमालगंज स्थित नवीन मंडी में सरकारी खरीद केंद्र पर पसरा सन्नाटा। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
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कमालगंज। होली से पहले ही तेज गर्मी का असर गेहूं की पैदावार पर दिखने लगा है। पैदावार घटकर करीब आधी ही रह गई है। जिस खेत में पहले प्रति बीघा साढ़े चार क्विंटल गेहूं होता था, उसमें इस बार सवा दो या फिर ढाई क्विंटल ही गेहूं निकला है।
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इससे मंडी में गेहूं की आमद कम है। मंडी में गेहूं का भाव 2100 रुपये क्विंटल है। जबकि सरकारी खरीद में 2015 रुपये क्विंटल रेट होने से रजिस्ट्रेशन करा चुके किसान भी अब केंद्र पर गेहूं नहीं दे रहे हैं।
इस बार आढ़तों पर गेहूं एमएसपी से 85 रुपये महंगा बिक रहा है। गल्ला व्यापारियों के अनुसार, 10 साल बाद ऐसी स्थिति आई है। नवीन मंडी में जब 1900 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं बिक रहा था, उस समय एक किसान ने 55 क्विंटल गेहूं 2015 रुपये के निर्धारित रेट मार्केटिंग विभाग के सरकारी खरीद केंद्र पर बेचा था। इसके बाद मंडी में गेहूं का भाव बढ़कर 2100 रुपये पहुंच गया है।
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इससे रजिस्ट्रेशन करा चुके किसानों ने भी सरकारी खरीद में गेहूं देने से किनारा कर लिया है। केंद्र प्रभारी गिरीश चंद्र का कहना है कि वह रजिस्ट्रेशन वाले किसानों से लगातार संपर्क कर रहे हैं। पर केंद्र पर गेहूं नहीं आ रहा। आढ़ती विनोद राठौर ने कहा कि जब बाजार में गेहूं सस्ता व सरकारी खरीद में महंगा होता तब तो सभी आढ़तियों को बिचौलिया कह दिया जाता था।
कम से कम इस बार इस जहमत से बचकर साहूकार बने हैं। सीजन के समय हर आढ़त पर रोजाना चार से पांच ट्राली गेहूं आता था। इस साल गेहूं महंगा होने के बावजूद उत्पादन में कमी से आमद घट गई है।
पांच बीघा में 15 बोरी गेहूं ही निकला
- टढ़ा नगला निवासी किसान तुलाराम ने कहा कि उनके गांव में बहुत से किसानों के खेतों में पांच बीघा में नौ क्विंटल गेहूं ही निकला है। पता नहीं कौन सी हवा चली की उत्पादन 40 से 50 प्रतिशत कम हो गया। होली से पहले एकाएक पड़ी तेज गर्मी से भी गेहूं का दाना पूरी तरह परिपक्व नहीं हो पाया। इससे गेहूं कम निकल रहा है।
तापमान बढ़ने से गिरी पैदावार
जिला कृषि अधिकारी राकेश कुमार ने स्वीकार किया कि फसल तैयार होने से कुछ समय पहले एकाएक तापमान बढ़ने से गेहूं की पैदावार गिरी है। पिछैती फसल में ज्यादा नुकसान है। मोहम्मदाबाद स्थित सरकारी फार्म में नवंबर में बोया गया गेहूं 28 क्विंटल हेक्टेयर के हिसाब से निकला। जबकि बाद वाला गेहूं 18 क्विंटल हेक्टेयर ही निकला। पैदावार कम होने से किसानों को भाव अच्छा मिल रहा है।
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