कंपिल। गांव पट्टी मदारी में सरकारी तालाब और बेड़ारास की भूमि पर अवैध कब्जे के साथ करोड़ों रुपये से कराए गए विकास कार्यों में चेयरमैन की मनमानी का सात सालों से विरोध हो रहा है। इस संबंध में कई बार शिकायतें शासन स्तर तक की गईं लेकिन कार्रवाई पहली बार हुई है।
सपा सरकार में कंपिल चेयरमैन उदयपाल सिंह की तूती बोलती थी। कंपिल को पर्यटन स्थल की तरह विकसित करने के लिए पांच करोड़ रुपये व मेगा सोलर प्लांट मिला। अन्य कार्यों के लिए भी करोड़ों रुपये मिले, जिनसे मनमाने तरीके से काम कराए गए। तालाब की भूमि पर बने गेस्ट हाउस व भ्रष्टाचार को लेकर पूर्व चेयरमैन पुष्पा शुक्ला के पति छोटे शुक्ला, फितरत उल्ला खां, नवनीत पांडेय, कमलेश पाठक, अमित शाक्य आदि ने तत्कालीन पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी सहित कई नेताओं से शिकायत की थी।
तालाब पर कब्जे को लेकर हुई शिकायतों में चेयरमैन फंस गए। इस पर जनवरी 2021 में तत्कालीन तहसीलदार ने कानूनगो की रिपोर्ट पर भूमि को सरकारी तालाब की बताकर अवैध गेस्ट हाउस को हटाने के आदेश दिए थे, लेकिन कार्रवाई लटकी रही। 10 दिन पूर्व मुकेश यादव की शिकायतों पर अब कार्रवाई शुरू हुई है।
निजी संपत्ति की तरह कर रहे थे इस्तेमाल
गांव पट्टी मदारी में बने गेस्ट हाउस को प्रशासन की कार्रवाई से बचाने के लिए चेयरमैन के प्रयास कारगर नहीं हुए। कहने को गेस्ट हाउस नगर पंचायत के धन से बना था, लेकिन चेयरमैन गेस्ट हाउस को निजी संपत्ति की तरह इस्तेमाल कर रहे थे। गेस्ट हाउस को बचाने के लिए चेयरमैन उदयपाल सिंह यादव ने हर प्रयास किए।
इसके लिए उन्होंने तहसीलदार को प्रार्थना पत्र देकर तालाब की भूमि के बराबर दूसरी जगह देने की भी पेशकश की, लेकिन मुख्यमंत्री की सख्ती के चलते कार्रवाई नहीं रुकी। गेस्ट हाउस को गिराने की कार्रवाई शुरू हुई तो गेस्ट हाउस की छत पर बड़ी संख्या में सोलर प्लेटें, कमरों में 15 से अधिक बैटरिया व फर्नीचर रखा मिला। इससे पता चलता है कि गेस्ट हाउस निजी संपत्ति की तरह इस्तेमाल हो रहा था।
नगर पंचायत के धन के दुरुपयोग का भी बन सकता है मामला
चेयरमैन की मुसीबतें और बढ़ सकती हैं। गांव पट्टी मदारी में तालाब की भूमि पर कब्जा कर गेस्ट हाउस का निर्माण कराया गया था। जो धन कांपिल टाउन के विकास में खर्च होना चाहिए था, उसे मनमाने ढंग से ग्राम सभा पट्टी मदारी में खर्च किया गया। गेस्ट हाउस के ध्वस्तीकरण के बाद जांच आगे बढ़ी तो चेयरमैन की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
कार्रवाई के दौरान नहीं दिखे चेयरमैन
गेस्ट हाउस के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान न तो चेयरमैन दिखे न ही शिकायतकर्ता पहुंचे। एसडीएम के बुलडोजर के साथ पहुंचते ही मौके पर लोगों की भीड़ लग गई, जिसे पुलिस ने डंडे फटकार कर खदेड़ दिया। करीब तीन घंटे तक कार्रवाई होती रही। प्रभाव शाली चेयरमैन के कार्य पर सरकारी बुलडोजर चलने को लेकर कस्बे में कई तरह की चर्चाएं रहीं।
दो घंटे पहले लग गई थी कार्यवाही की भनक
गेस्ट हाउस को गिराए जाने की कार्यवाही की भनक चेयरमैन पक्ष को दो घंटे पहले ही लग गई थी। प्रशासन जब मौके पर पहुंचा, तो उन्हें चेयरमैन के 12 से अधिक कर्मचारी गेस्ट हाउस के ऊपर लगीं प्लेटें व अन्य सामान को निकालते मिले। प्रशासन व पुलिस को देख कर्मचारी कई समान कमरों में ही छोड़कर भागने लगे। इस पर एसडीएम ने कर्मचारियों को पांच मिनट का समय सामान को निकालने के लिए दिया, इसके बाद कार्यवाही शुरू हो गई।