कलक्ट्रेट में निरीक्षण करते राजस्व परिषद के अध्यक्ष मुकुल सिंहल व डीएम संजय कुमार सिंह। संवाद
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फर्रुखाबाद। राजस्व परिषद अध्यक्ष ने शुक्रवार को कलक्ट्रेट पहुंचकर सभी कार्यालयों का निरीक्षण किया। चकबंदी कार्यालय में 400 चक आपत्तियां लंबित होने पर शीघ्र निस्तारण कराने को कहा। उन्होंने एडीएम न्यायालय से खनिज पटल शिफ्ट कराने के निर्देश दिए।
राजस्व परिषद अध्यक्ष मुकुल सिंहल ने कलक्ट्रेट पहुंचकर सफाई व्यवस्था देखी। निरीक्षण के दौरान अपर जिलाधिकारी न्यायालय में खनिज पटल देख उन्होंने आपत्ति जताई और इसे हटाकर खनिज कार्यालय में शिफ्ट कराने के निर्देश दिए। चकबंदी कार्यालय में उन्होंने चक आपत्तियों के संबंध में जानकारी ली तो बताया गया कि 400 से अधिक मामले लंबित हैं। इस पर अध्यक्ष ने चक आपत्तियां शीघ्र ही निस्तारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कलक्ट्रेट में सभी कार्यालयों के साथ रिकार्ड रूम का निरीक्षण कर फाइलों का रखरखाव भी देखा। जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह, सीडीओ एम. अरून्मोली, एडीएम सुभाष चंद्र प्रजापति, सिटी मजिस्ट्रेट दीपाली भार्गव व सभी एसडीएम मौजूद रहे।
मचान विधि से सेम की खेेती को मिलेगा बढ़ावा
फर्रुखाबाद। ब्लाक बढ़पुर क्षेत्र के गांव न्यामतपुर में राजस्व परिषद अध्यक्ष मुकुल सिंहल ने चौपाल लगाकर किसानों से सेम की खेती की जानकारी ली। इस दौरान किसानों ने कहा कि सेम की खेती में मजदूरी व मचान का खर्च अधिक आता है। इस पर अध्यक्ष ने जिला आलू विकास अधिकारी को सब्जी की फसलों की तरह सेम खेती करने वाले किसानों को सब्सिडी का लाभ दिलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अच्छे किसानों को छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों का भ्रमण कराकर मचान विधि से सब्जी की खेती का प्रशिक्षण दिलाया जाए।
राजनीतिक दबाव में गलत सीमांकन की शिकायत
राजेपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत कंचनपुर सबलपुर के पूर्व प्रधान रामवरन वर्मा व भाकियू मंडल उपाध्यक्ष प्रभाकांत मिश्रा ने ग्रामीणों के साथ कलक्ट्रेट में राजस्व परिषद अध्यक्ष से शिकायत की। इसमें कहा कि वर्ष 2015 में ग्राम पंचायतों का राजनीतिक दबाव में गलत तरीके से परिसीमन किया गया। मौजा सबलपुर गैरआबाद में वोटर न होने के बावजूद करीब पांच हजार बीघा ग्राम समाज व पैतृक भूमि हड़पने के उद्देश्य से जोगराजपुर में शामिल कर दिया गया था। पूर्व प्रधान ने मौजा सबलपुर गैरआबाद को पुन: ग्राम पंचायत कंचनपुर में शामिल करने की मांग की। चंद्रपाल, श्यामबाबू, किशनपाल, पूनम देवी, धीरेंद्र सिंह आदि के शिकायत पर हस्ताक्षर हैं।