कायमगंज में बाइपास रोड पर अलाव तापते लोग। संवाद
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फर्रुखाबाद। मौसम के तेवर बदलने से आलू की फसल पर फिर संकट के बादल गहरा गए हैं। बूंदाबांदी होने से किसान खासे चिंतित हैं। वहीं दिन भर धूप न निकलने से ठंड भी बढ़ी है। बिगड़े मौसम से सरसों व सब्जी की फसलें प्रभावित होने की आशंका है, वहीं गेहूं की फसल में फायदा है।
आसमान में सोमवार से छाये हल्के बादल मंगलवार को गहरा गए। दिन भर धूप न निकलने के साथ ही दोपहर को बूंदाबांदी भी हुई। इससे ठिठुरन बढ़ गई। आज अधिकतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं मौसम का मिजाज देख आलू किसानों की धड़कनें तेज हो गईं। अक्तूबर की बारिश से कच्ची फसल बर्बाद हो चुकी है। अब खेतों में खड़ी आलू की फसल पर भी संकट है। धूप न निकलने और तापमान गिरने से आलू में झुलसा की आशंका बढ़ रही है। वहीं सरसों व हरी सब्जी की फसलें भी प्रभावित होने की आशंका है।
किसान बोले
मोहम्मदाबाद क्षेत्र के गांव धीरपुर निवासी संजय सिंह ने बताया कि बूंदाबांदी होने से आलू में झुलसा रोग लगने की आशंका है। एक बार झुलसा से बचाव के लिए दवाई का छिड़काव कर चुके हैं। यदि बरसात हुई तो दो-तीन बार छिड़काव करना पड़ेगा। गांव संतोषपुर निवासी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि बरसात होने से आलू की फसल में नुकसान होगा। बचाव के लिए दवा डालनी पड़ेगी।
ये फसलें होंगी प्रभावित
कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुशील कुमार का कहना है कि बादल होने के साथ बूंदाबांदी व तापमान गिरना गेहूं की फसल के लिए फायदेमंद है। वहीं, आलू के लिए नुकसानदायक है। पाला गिरने से आलू में झुलसा रोग की आशंका बढ़ जाती है। आलू की फसल बचाने के लिए किसान 200 ग्राम मैंकोजेब व 9 ग्राम स्टेप्टोसाइक्लीन 100 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। पांच से सात दिन तक मौसम साफ न हुआ तो सरसों व हरी सब्जी की फसलें भी प्रभावित हो सकती हैं। इनमें झुलसा के साथ सरसों में माहूं का खतरा बढ़ जाता है। बचाव के लिए किसान एक किलो सल्फर (एक प्रतिशत) 100 लीटर पानी में घोलकर सरसों व सब्जी की फसलों पर छिड़काव करें।
अभी किसी फसल में नुकसान नहीं
जिला कृषि अधिकारी डॉ.राकेश कुमार सिंह ने बताया कि हल्की बारिश में किसी भी फसल में नुकसान नहीं है। गेहूं के लिए बारिश व ठंड बढ़ना फायदेमंद है। यदि एक सप्ताह तक मौसम साफ नहीं होता है तो आलू, सरसों व हरी सब्जी की फसलों में नुकसान होने की आशंका है। उन्होंने बताया कि दिसंबर के अंतिम सप्ताह तक बोई जाने वाली गेहूं की फसल में 20 प्रतिशत पैदावार प्रभावित होगी। जनवरी के पहले सप्ताह में 30 व दूसरे सप्ताह में बोई जाने वाली गेहूं की फसल में पैदावार 40 प्रतिशत घट जाती है।