फर्रुखाबाद। दिवाली का पर्व धूमधाम से मनाया गया। घरों में लक्ष्मी पूजन के बाद घरों में दीपकों को सजाया गया। लोगों ने खूब आतिशबाजी चलाई। रंग-बिरंगी झालरों से मकानों, इमारतों और प्रतिष्ठानों को सजाया गया। देर रात तक पटाखे छोड़े जाते रहे।
गुरुवार शाम साढ़े पांच बजे अंधेरा होते ही शहर रंग-बिरंगी झालरों से जगमग हो गया। छह बजे से घरों में पूजन किया गया। मां लक्ष्मी और गणेश के पूजन के बाद देेशी घी के दीपकों को प्रज्वलित कर मकान के अंदर रखा गया। बाद में घरों के बाहर, छतों, गांवों में चबूतरों पर दीपमाला बनाकर दीया रखे गए। इसके बाद शुरू हुई आतिशबाजी देर रात तक चलती रही। आसमान में रंग-बिरंगी आतिशबाजी का नजारा लोग देखते रहे। बाद में परिजनों ने एक साथ पकवान खाए। अपने परिवारों के बुजुर्गों से आशीर्वाद लिए।
फूलों की दुकानों पर रही भीड़
शहर के भोलेपुर, बढ़पुर, घुमना मंडी में फूलों की खूब खरीदारी हुई। 11 रुपये से 100 रुपये तक की माला की बिक्री हुई। तमाम लोगों ने घरों, पूजा स्थलों की सजावट के लिए फूलों की खरीदारी की। शाम तक भीड़ लगी रही।
जैन मंदिर में मनाया वीर निर्वाण महोत्सव
शहर के जोगराज स्ट्रीट स्थित महावीर स्वामी दिगंबर जैन मंदिर में जैन समाज ने दिवाली और महावीर स्वामी के वीर निर्वाण महोत्सव मनाया गया। महावीर स्वामी का अभिषेक एवं शांतिधारा पूजन कर निर्वाण लाड़ू चढ़ाया गया। कन्हैया लाल जैन ने बताया कि महावीर स्वामी को आज के ही दिन मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। शाम को उनके प्रथम शिष्य गौतम गणधर को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। इस मौके पर कमल कुमार जैन, अभिषेक जैन, रोमिल जैन, प्रियंकर जैन, पवन कुमार जैन, नीरज जैन, विमल शरण जैन, संजय जैन, मोहित जैन, प्रभात जैन, हर्षित जैन आदि थे।
खील के दाम सुबह 120, शाम को 70 रुपये बिकी
खील के फुटकर विक्रेताओं ने सुबह में खील 120 रुपये किलो में बेची। शाम को भीड़ कम होने और माल अधिक होते ही 70 रुपये किलो तक बिक्री की गई। खील विक्रेताओं ने बताया कि अंतिम दिन है। लिहाज खरीद के दाम ही निकल आएं, वही बहुत है।