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बूंदाबांदी से शहर व ग्रामीण इलाकों की घंटो बिजली रही बंद

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खेत में आलू बीनते किसान। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
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फर्रुखाबाद। लॉकडाउन के बीच शुक्रवार सुबह शुरू हुई बूंदाबांदी सड़कों पर सन्नाटे में और सहायक बनी। इस दौरान लोग घरों से नहीं निकले और पुलिस प्रशासन को भी ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी। उधर, शहर व ग्रामीण क्षेत्र में 11केवी लाइनों में कई जगह फाल्ट आ गया। इससे शहरी व ग्रामीण इलाकों की तीन से चार घंटे तक बिजली गुल रही। फाल्ट ठीक होने के बाद बिजली चालू हो सकी। दूसरी ओर बूंदाबांदी देख किसानों की धड़कन तेज हो गई। मौसम के हाल देखकर बोले बारिश तेज हुई तो गेहूं सहित अन्य फसलों में नुकसान तय है।
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लॉकडाउन का शुक्रवार को तीसरा दिन था। सुबह से ही आसमान में घने बादल, ठंडी हवाएं और बूंदाबांदी के चलते लोग घरों में ही दुबके रहेे। डीएम, एसपी का काफिला भी शहर में राउंड पर रहा। बूंदाबांदी के दौैरान सड़क पर दिखने वाली पुलिस भी काफी कम नजर आई। हालांकि दोपहर के वक्त कुछ देर के लिए लोगों की चहलकदमी बढ़ी, तो पुलिस ने कुछ स्थानों पर डंडे दिखाकर लोगों को आदेशों का पालन करने की हिदायत दी। एएसपी त्रिभुवन सिंह, सीओ सिटी मन्नीलाल गौंड दो घंटे लालगेट चौराहे पर डटे रहेे। उन्होंने निकलने वाले दोपहिया, चौपहिया वाहनों को रोककर पूछताछ भी की। हालांकि ज्यादा सख्ती न बरतते हुए सिर्फ हिदायत देकर ही जाने दिया। लोगों में कोरोना का खुद भय बना हुआ है।
उधर, बूंदाबांदी से शहरी क्षेत्र के फतेहगढ़ विद्युत उपकेंद्र की 11केवी लाइन में फाल्ट आया गया। घुमना बाजार में चौक फीडर की 11 केवी लाइन का बंच केबल जल गई। इटावा-बरेली हाईवे पर एक रेस्टोरेंट के पास सूखा पेड़ 33केवी लाइन पर गिर गया। इससे जसमई विद्युत उपकेंद्र ठप हो गया। शहरी क्षेत्र की बिजली बंद हो गई। फाल्टों को कर्मचारियों ने खोज कर ठीक किया। इसमें करीब तीन से चार घंटे का समय लग गया। जब फाल्ट ठीक हुआ तब बिजली चालू की गई। गंगापार क्षेत्र के अमृतपुर, राजेपुर, सलेमपुर और तहसील अमृतपुर विद्युत उपकेंद्र की भी 11केवी में फाल्ट आने से ग्रामीण क्षेत्रों की करीब ढाई घंटा बिजली गुल रही।
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उधर, बूंदाबांदी देख किसान चिंतित हो गए। दरअसल, इन दिनों खेतों में गेहूं की फसल लगभग तैयार खड़ी है। आलू भी अभी खेतों में ही पड़ा है। बारिश से सरसों, चना व मटर की फसलों में भी नुकसान होना तय है। मौसम का मिजाज देखकर किसानों की धड़कनें बढ़ गई हैं। ओले गिरने की आशंका से किसान ईश्वर से दयादृष्टि बनाए रखने की मन्नतें मांग रहे हैं।
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