फर्रुखाबाद। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रवीण कुमार त्यागी ने निलंबित ग्राम पंचायत सचिव व संविदा कर्मी के खिलाफ गबन की रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया है। दोनों पर 6.75 लाख रुपये गबन करने का आरोप है।
ग्राम सभा भुसेरा के प्रधान विनय कुमार सिंह ने निलंबित ग्राम पंचायत सचिव दिलीप कुमार और बढ़पुर ब्लाक में तैनात संविदा कर्मी टीए मनोज कुमार सक्सेना के खिलाफ कोर्ट में अर्जी दायर की थी। इसमें बताया कि वह 2015 से 2020 तक ग्राम सभा भुसेरा का प्रधान रहा। इस दरौन पंचायत भवन का निर्माण प्रारंभ कराया था।
दो लाख 66 हजार 608 रुपये निर्माण सामग्री व 37 हजार 222 रुपये मजदूरी पर खर्च हुए। यह पूरा धन अपने पास से खर्च किया। पंचायत भवन निर्माण में कुछ काम होना रह गया था। जो काम कराया था, उसकी एमबी करा दी थी, लेकिन भुगतान नहीं मिला था। तभी 2020 में प्रधानी का कार्यकाल समाप्त होने पर ग्राम पंचायत सचिव को प्रशासक नियुक्त किया गया। सचिव ने अपने कार्यकाल में अधूरा काम पूरा कराया।
चुनाव के बाद दोबारा प्रधान बनने पर ग्राम सभा का कार्यभार संभाला और बीडीओ के मौखिक आदेश पर पंचायत भवन की रंगाई पुताई व अन्य काम कराए। जिसमें करीब 99 हजार 606 रुपये खर्च किया। पानी की पाइप लाइन की फिटिंग भी कराई। इसमें भी 56 हजार 486 रुपये खर्च किए। इस प्रकार उसने कुल 4 लाख 96 हजार 714 रुपये खर्च किए। यह पूरा पैसा ग्राम पंचायत सचिव व टीए ने फर्जी एमबी बनाकर खुद भुगतान करा लिया।
पंचायत भवन में टाइल्स और बिजली फिटिंग कराए बिना फर्जी एमबी बनाकर 1 लाख 79 हजार 235 रुपये हड़प लिए। इस प्रकार सचिव और टीए ने 6 लाख 75 हजार 949 रुपये का गबन कर लिया। इसकी शिकायत डीएम व सीडीओ से की, जांच में गबन मिलने पर सचिव को निलंबित कर दिया गया और टीए को राजेपुर से बढ़पुर ब्लाक में तैनात कर दिया गया।
किसी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई। प्रधान के अधिवक्ता राजकुमार सिंह राठौर ने अर्जी पर सुनवाई के दौरान दलीलें पेश कीं। सुनवाई पूरी होने के बाद सीजेएम ने राजेपुर थानाध्यक्ष को रिपोर्ट लिखने का आदेश दिया है।