मऊ रशीदाबाद स्थित मकबरे के पास लगा कूड़े का ढेर व घास खाता घोड़ा। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
कायमगंज। गांव मऊ रशीदाबाद में स्थित 16 वीं सदी का नवाब रशीद मियां का मकबरा (रौजा) बदहाल है। पुरातत्व विभाग ने इसे राष्ट्रीय महत्व का घोषित कर जीर्णोद्धार कराने के बाद दोबारा सुध नहीं ली। देखरेख के अभाव में यहां कूड़े के ढेर लगे हैं। छत पर घास उग आई है। एक बोर्ड व बैरिकेडिंग तोड़ दी गई है। इमारत भी चटकने लगी है। विश्व पर्यटन दिवस पर कुछ लोगों ने इसकी बदहाली पर चिंता जताई है।
शहंशाह अकबर की सल्तनत में चार हजार सैनिकों के मंसबदार व शमसाबाद के जागीरदार नवाब रशीद मियां ने अपनी जागीर में सैदपुर ,चौक, किला, बड़ा बाजार आदि मोहल्ले आबाद किए थे। कोट में उन्होंने एक खूबसूरत बाग लगवाया था। अपने जीवन काल में उन्होंने वर्ष 1607 में इसी बाग में एक मकबरे की बुनियाद रखी थी। 1649 में दक्षिण के नादेर में उनका इंतकाल हुआ। उन्हें इसी मकबरे में दफन किया गया। इस मकबरे को रशीद मियां का रौजा कहा जाता है। 16वीं सदी की इस इमारत को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने संरक्षित कर लिया। इसका जीर्णोद्धार भी कराया गया, लेकिन देखरेख के अभाव में इस भवन परिसर में कूड़े के ढेर लगे हैं। यहां उपले पाथे जाते हैं। इमारत भी कई जगह से चटकने व उखड़ने लगी है। आसपास का इलाका तो मानो पशुओं की चारागाह बना है।
सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद आकिब खां ने बताया वर्ष 2014 में मकबरे का 9.88 लाख रुपये से जीर्णोद्धार कराया गया था। देखरेख के अभाव में मकबरे की हालत खस्ताहै। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ए एस आई) व स्थानीय प्रशासन से इसकी देखरेख के लिए मांग की गई लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
मऊ रशीदाबाद निवासी यूसुफ खां का कहना है इस मकबरे पर तमाम अकीदतमंद दूरदराज से आते थे। अब दुर्दशा के शिकार मकबरे पर कम ही लोग पहुंचते हैं। मकबरे के आसपास गंदगी रहती है। छत पर घास उग आई है। बैरिकेडिंग तोड़ दी गई है। परिसर में अतिक्रमण भी हो रहा है।
ऊ रशीदाबाद स्थित मकबरे के पास परिसर में नियम व कानून का लगा बोर्ड। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD
मोहम्मद आकिब खां। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD
यूसुफ खां। फर्रुखाबाद- फोटो : FARRUKHABAD