फर्रुखाबाद। सदर तहसील के सब रजिस्ट्री दफ्तर के ताले तोड़कर नकदी और गोपनीय दस्तावेज गायब होने के मामले में गुरुवार को कानपुर से आए डीआईजी स्टांप और सहायक महानिदेशक निबंधक (एआईजी) ने जांच पड़ताल की। सुबह से बैनामे तो किए गए लेकिन वकीलों और दस्तावेज लेखकों के मुंशियों का प्रवेश प्रतिबंधित रहा। वहीं, नामजद सभी सात कर्मी दिनभर दफ्तर में काम करते रहे। शाम पांच बजे के बाद पुलिस ने उनसे दोबारा पूछताछ की।
रजिस्ट्री दफ्तर में मंगलवार रात चोरों ने मुख्य दफ्तर के चैनल के कुंडे व ताले तोड़कर तिजोरी में रखे 4.58 लाख 840 रुपये चोरी कर लिए गए। बैनामा संबंधी सबसे महत्वपूर्ण पत्रावलियों में शामिल जिल्द से गोपनीय कागजात फाड़ कर गायब कर दिए गए। इस वारदात में उपनिबंधक रविकांत ने दफ्तर में काम करने वाले अमित कुमार, सोनू, रवि, शिवम, शेरा, रमेश सिंह, रोहित और मुंशियों पर शक जताते हुए चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई है।
पुलिस ने कई घंटे पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया। गुरुवार सुबह से दफ्तर खुला तो सभी कर्मचारी अपने-अपने स्थानों पर काम करते रहे। सुबह रोज की तरह बैनामे लेकर वकीलों और दस्तावेज लेखकों के मुंशी पहुंचे तो गेट पर खड़े शक में नामजद शेरा ने अंदर जाने से रोक दिया। कहा कि फिलहाल सिर्फ वकील अथवा दस्तावेज लेखक ही बैनामे कराएंगे। दफ्तर में बैनामे किए गए।
दोपहर में कानपुर से आए डीआईजी स्टांप ज्ञानेंद्र सिंह, सहायक महानिदेशक निबंधक प्रवीन सिंह रजिस्ट्री दफ्तर पहुंचे। उन्होंने चैनल के कुंडे देखे। दफ्तर में चंद मिनट रुकने के बाद उपनिबंधक के दफ्तर में चले गए। दफ्तर के सूत्र बताते हैं कि उन्होंने कई गोपनीय पत्रावली और स्टांप संबंधी कागजात तलब किए। हालांकि सब रजिस्ट्रार रविकांत इस बारे में कोई जानकारी नहीं दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि चोरी हुई है। बड़े अधिकारी जांच कर रहे हैं। कुछ खास हाथ नहीं लगा है। थानाध्यक्ष बलराज भाटी ने बताया कि जांच चल रही है। दफ्तर का काम जरूरी है। चोर भागकर कहां जाएंगे। शाम पांच बजे के बाद दफ्तर का काम खत्म होते ही सभी कर्मियों से पूछताछ शुरू की जाएगी। शीघ्र ही मामला खुल जाएगा।
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वकीलों व दस्तावेज लेखकों को हुई दिक्कत
तहसील बार एसोसिएशन के सचिव अतुल मिश्रा ने कहा कि मुंशी हमारे आंख व हाथ हैं। उनके प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने से बड़ी दिक्कत है। शुक्रवार को अधिवक्ताओं बैठक बुलाई है। उनकी राय के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।
कामों में सहायक बनते प्राइवेट कर्मी
दफ्तर में प्राइवेट कर्मियों से काम कराने की हर अफसर को जानकारी है। मगर जानबूझ कर उन पर अंकुश नहीं लगाया जाता। दफ्तर के सूत्र बताते हैं कि इन प्राइवेट कर्मियों से कई तरह के काम कराए जाते हैं जबकि उन कामों का बड़ा फायदा दफ्तर के जिम्मेदारों को ही मिलता है। जिम्मेदार इस पर अंकुश लगाने की जरूरत नहीं समझते।