नलकूप विभाग के स्टोर में भरा लोहे का कबाड़ा।
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नलकूप विभाग में तीन माह से चल रही जांच अंतिम दौर में है। उधर, अनियमितताएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जांच में देरी होने से अब तो साक्ष्य मिटाने का भी खेल जोरों से चल निकला है। कापर, पीतल का स्क्रैप हटाने के बाद अब लोहे की बारी है।
नलकूप विभाग में फर्जी वर्कआर्डर से भुगतान के मामले में मुख्य विकास अधिकारी डा.राजेंद्र पैंसिया के आदेश पर 25 जुलाई से जांच चल रही है। स्टोर में भंडारित सामान व अभिलेखों में वित्तीय अनियमितताएं मिल चुकी हैं। करोड़ों रुपये के कार्य वर्कआर्डर पर चहेती फर्मों से कराए जाने का मामला भी प्रकाश में आ चुका है।
जांच अंतिम दौर में है। करीब 12 जिम्मेदार कार्रवाई के घेरे में हैं। इसके बाद स्टोर के जेई रूपकिशोर का स्थानांतरण फिरोजाबाद होने पर उन्हें कार्यमुक्त कर 20 सितंबर को अवर अभियंता गौरव सक्सेना को स्टोर का चार्ज दे दिया गया।
इस दौरान स्टोर में करीब 50 क्विंटल कापर वायर स्क्रैप, जबकि 15 क्विंटल पीतल स्क्रैप होने की जानकारी मिली थी। बिना नीलामी ही बुधवार रात करीब 30 लाख का स्क्रैप स्टोर से हटा दिया गया। अब सैकड़ों क्विंटल लोहे का स्क्रैप मोटर, पंपसेट, इंपैलर, बाउल एसेंबली आदि भी हटाने की तैयारी है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
नलकूप विभाग के सहायक अभियंता अमर सिंह ने बताया कि 40 टन कापर स्क्रैप केंद्रीय कार्यशाला कानपुर भेजा गया है। शेष कापर व पीतल का स्क्रैप स्टोर में रखा है। बताया कि लोहे का स्क्रैप कमेटी गठित कर नीलामी प्रक्रिया से हटाया जाएगा। कापर स्क्रैप की नीलामी को कमेटी गठित न करने के सवाल पर कहा कि इसकी जटिल प्रक्रिया होने से अधिशासी अभियंता के आदेश पर केंद्रीय कार्यशाला भेज दिया गया। अधिशासी अभियंता ओपी गुप्ता का फोन रिसीव न होने से संपर्क नहीं हो सका।