कमालगंज। आलू की बोआई के लिए किसान खाद की व्यवस्था करने में लगे हैं। लेकिन सहकारी समितियों पर किल्लत के चलते दुकानदार इसका फायदा उठा रहे हैं और किसानों से डीएपी व एनपीके की निर्धारित कीमत से 300 रुपये प्रति बोरी अधिक वसूल रहे हैं। उधर, सहकारी समिति कमालगंज के सचिव के पास पांच समितियों का चार्ज होने से किसानों को खाद के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
साढ़े चार हजार सदस्यों वाली बहुउद्देश्यीय सहकारी समिति कमालगंज के सचिव मानसिंह के पास सहकारी समिति जहानगंज, सहकारी समिति नहरैया चौंसेपुर, नवीन सहकारी समिति कंधरापुर व सहकारी समिति मूसाखिरिया का भी प्रभार है। सहकारी संघ जहानगंज के प्रभार को शामिल कर लें तो वह छह सचिव की जिम्मेदारी देख रहे हैं। इसके चलते किसानों को सचिव के न मिलने से बिना खाद लिए ही वापस होना पड़ता है।
सहकारी समिति कमालगंज में बैठे कुछ किसानों ने बताया कि खाद की कालाबाजारी हो रही है। दुकानों पर सरकारी रेट में 1350 रुपये मिलने वाली डीएपी की बोरी 1650 से 1700 रुपये में मिल रही है। एनपीके की बोरी दुकानों पर 1900 के बजाय 2200 रुपये में दी जा रही है।
सचिव मान सिंह ने बताया कि वह कमालगंज में सोमवार व मंगलवार तथा जहानगंज में बृहस्पतिवार व शुक्रवार को बैठते हैं। अन्य दिनों में जब किसान इकट्ठे हो जाते हैं तो भी वह आ जाते हैं। उन्होंने कहा कि कमालगंज में 914 बोरी यूरिया, 707 बोरी डीएपी, 12:32:16 एनपीके 1103 बोरी व 10:26:26 एनपीके 135 बोरी है। खाद की कमी नहीं है। एडीओ योगेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि कर्मचारियों की कमी से सचिव को अतिरिक्त प्रभार देना पड़ा। (संवाद)