कायमगंज। हरसिंगपुर गोवा रेलवे स्टेशन पर 46 वर्ष पहले सहायक स्टेशन मास्टर (एएसएम) को बंधक बनाकर लूटपाट करने वाला शातिर बदमाश 42 साल तक नाम बदलकर अलग-अलग शहरों में छिपता रहा। जिला न्यायालय से सजा मिलने के बाद वह उच्च न्यायालय में अपील के दौरान फरार हो गया था। उसके खिलाफ हाईकोर्ट से वारंट जारी था। आखिरकार कायमगंज कोतवाली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। अब अदालत ने उसे जेल भेज दिया है।
आठ सितंबर 1980 को कन्नौज के इंदरगढ़ थाना क्षेत्र के गांव जगतापुर निवासी हरिश्चंद्र उर्फ पक्का उर्फ गिरंद सिंह ने अपने चार साथियों भगवान दास, प्रेम सिंह, पुत्तीलाल और मन्ना सिंह के साथ तमंचा, चाकू और लाठी के बल पर हरसिंगपुर गोवा रेलवे स्टेशन पर धावा बोला था। तत्कालीन एएसएम कृपास्वरूप सक्सेना को बंधक बना लिया था और टिकट बिक्री के करीब दो हजार रुपये, रेलवे के अभिलेख तथा यात्रियों का सामान भी लूट लिया था। जीआरपी ने मुकदमा दर्ज किया था।
पुलिस जांच में सामने आया कि एफआईआर में उसका नाम ''पक्का'' दर्ज था। बाद में उसने हरिश्चंद्र उर्फ पक्का नाम रख लिया और इधर-उधर अलग-अलग शहरों में रहता रहा। कायमगंज के चियोलारा गांव का मूल निवासी पक्का यहां गिरंद सिंह के नाम से जाना जाता था। पुलिस से बचने के लिए वह लगातार अपनी पहचान और ठिकाने बदलता रहा। वह कभी हरदोई, फतेहपुर, कानपुर तो कभी लुधियाना में अपने बेटों के यहां ठहरता था। बाद में वह गांव जगतापुर थाना इंदरगढ़ में दूसरी शादी कर वहीं रहने लगा लेकिन पुलिस उसकी तलाश में लगातार जुटी रही।
लूटपाट के मामले में अन्य चारों को सजा मिल गई थी, जबकि हरिश्चंद्र उर्फ पक्का फरार हो गया था। जिला न्यायालय ने 23 मार्च 1984 को उसे चार वर्ष के कठोर कारावास और दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार शुक्ला ने बताया कि हाईकोर्ट से जारी वारंट के आधार पर बुधवार को श्यामनगर के पास एक बाग से पक्का को गिरफ्तार किया गया।