फर्रुखाबाद। आरपीएफ और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने रेल टिकट की कालाबाजारी करने वाले अंतरराज्जीय गैंग के दलाल को गिरफ्तार किया है। उसका कई राज्यों में नेटवर्क था। उसने फर्जी पते से मोबाइल सिम लिया था और बैंक में एकाउंट खोला था। आरोपी मूल रूप से बिहार के किशनगंज का रहने वाला है।
आरपीएफ इंस्पेक्टर वीरेंद्र कुमार ने पिछले साल गुरसहायगंज स्टेशन पर टिकट की कालाबाजारी करने में पांच रेल कर्मियों और चार दलालों को गिरफ्तार किया था। जांच में मिले मोबाइल नंबरों की मदद से अंतरराज्जीय टिकट दलाल खालिद अंजुम का नाम प्रकाश में आया। इंस्पेक्टर ने विभागीय क्राइम ब्रांच के सत्येंद्र प्रताप सिंह एवं वीरेंद्र कुमार सिंह के साथ खालिद की तलाश शुरू की।
पता चला कि खालिद के मोबाइल का सिम मथुरा के फर्जी पते पर लिया गया था। स्टेट बैंक में खुलवाए एकाउंट में मुंबई के पते की फेंक आईडी लगी थी। पुलिस ने बुधवार रात दिल्ली के जामा मस्जिद के पास मोटर मार्केट से खालिद अंजुम को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में खालिद ने बताया कि कई सालों से रेलवे के आरक्षित टिकटों की कालाबाजारी का काम कर रहा था। सुरक्षित स्थान के मकसद से मोटर मार्केट को चुना। वहीं, नाज टूर एंड ट्रैवल्स एजेंसी खोलकर टिकट की दलाली करने लगा।
कबूला कि उसने पूर्वोत्तर रेलवे के लखीमपुर, सीतापुर, मथुरा छावनी, हल्द्वानी, बहराइच, हाथरस, गंजडुडवारा, कासगंज आदि जिलों के आरक्षण केंद्रों में तैनात क्लर्कों एवं टिकट दलालों से मिलकर तत्काल टिकटों की कालाबाजारी की। पुलिस से बचने के लिए मोबाइल और बैंक खाते में फेंक आईडी प्रयोग की। हालांकि वह मूल रूप से बिहार के किशनगंज का रहने वाला है। उसकी कई अन्य प्रांतों में भी रेल कर्मियों से सेटिंग थी।
कई दलाल और रेल कर्मी निशाने पर
खालिद अंजुम के खुलासे के बाद आरपीएफ ने कई दलालों और संलिप्त विभागीय कर्मियों की तलाश शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि कई स्टेशनों पर तैनात क्लर्कों के बैंक खातों को खंगालने के बाद उनकी गिरफ्तारी भी हो सकती है। इससे रेल कर्मियों में हड़कंप मचा है।