फर्रुखाबाद। गुडवर्क दिखाने की होड़ में पुलिस गैर जमानती और जमानती वारंट के अंतर को ही भूल गई। मारपीट के मुकदमे में जारी जमानती वारंट पर राजेपुर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर दिया। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आरोपी को जमानत पर छोड़ दिया और राजेपुर थानाध्यक्ष को नोटिस जारी कर तीन दिन में स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए हैं।
राजेपुर थानाक्षेत्र के गांव दहेलिया निवासी सतेंद्र के खिलाफ मारपीट व धमकी का मुकदमा कोर्ट में चल रहा है। कोर्ट में उपस्थित न होने पर उसके खिलाफ 10 हजार रुपये का जमानती वारंट जारी कर राजेपुर थाने भेजा गया था।
गडवर्क दिखाने की होड़ में पुलिस जमानती और गैर जमानती वारंट में अंतर भूल गई। जमानती वारंट पर आरोपी सतेंद्र को गिरफ्तार कर पुलिस ने मंगलवार को कोर्ट में पेश किया। इस दौरान दरोगा राजेश कुमार ने कोर्ट में दी अपनी रिपोर्ट में आरोपी के खिलाफ गैर जमानती वारंट होने का जिक्र किया। आरोपी के अधिवक्ता दीपक द्विवेदी ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर कहा कि आरोपी के खिलाफ 10 हजार रुपये का जमानती वारंट जारी हुआ था।
पुलिस उसके घर गई तो आरोपी ने जमानत देने की बात कही, लेकिन पुलिस ने आरोपी की एक नहीं सुनी और उसको गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर दिया, जबकि आरोपी को थाने से जमानत दी जानी थी। राजेपुर थाना पुलिस ने कोर्ट के आदेश की अवहेलना की है।
वकील की ओर से आरोपी का जमानत प्रार्थना पत्र भी कोर्ट में पेश किया गया। न्यायिक मजिस्ट्रेट हवाली ने आरोपी को जमानत पर छोड़ दिया। कोर्ट के आदेश की अवहेलना करने पर राजेपुर थानाध्यक्ष को नोटिस जारी कर तीन दिन में स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है।