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फतेहपुर से आए लिपिक ने दर्ज कराए बयान

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फर्रुखाबाद। पिछले हफ्ते कन्नौज में हादसे की शिकार हुई बस को सामान्य से स्लीपर में बदलने के मामले में तीन अफसरों के अलावा वर्ष 2016 में तैनात रहे लिपिक कार्रवाई की जद में आ गए हैं। शुक्रवार को फतेहपुर में तैनात लिपिक ने एआरटीओ कार्यालय पहुंचकर बयान दर्ज कराए हैं। उनके कार्यकाल में ही विमल की बस को सामान्य से स्लीपर में बदला गया।
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परिवहन उपायुक्त आगरा व कानपुर ने कन्नौज बस हादसे में कानपुर के तत्कालीन पीटीओ कन्हैया प्रसाद गुप्ता (वर्तमान में एआरटीओ नोएडा), आरआई कानपुर जय सिंह व कन्नौज जिले के तत्कालीन पीटीओ आरएस वर्मा (वर्तमान में सेवानिवृत्त) को सामान्य बस को स्लीपर में बदलने के मामले में दोषी बनाकर रिपोर्ट परिवहन आयुक्त व प्रमुख सचिव लखनऊ को भेज दी है। इस मामले में वर्ष 2016 में पंजीयन पटल पर तैनात रहे लिपिक विनोद कुमार का नाम भी सामने आया है। उनके कार्यकाल में ही सामान्य बस को स्लीपर में बदला गया। बस की पत्रावली से कुछ कागजात भी गायब हैं। इससे वह भी जांच के घेरे में आ गए हैं। वह वर्तमान में फतेहपुर के एआरटीओ कार्यालय में तैनात हैं।
शुक्रवार को एआरटीओ शांतिभूषण पांडेय ने लिपिक विनोद कुमार को तलब किया था। लिपिक विनोद शुक्रवार शाम पांच बजे एआरटीओ कार्यालय में बयान दर्ज कराने पहुंचे। इस दौरान एआरटीओ किसी काम से बाहर गए थे। कुछ देर बाद एआरटीओ के पहुंचने पर विनोद ने बयान दर्ज करा दिए। विनोद का कहना है कि जब अधिकारी ने आदेश किया होगा तभी उन्होंने फिटनेस के प्रपत्र जारी किया होगा। लिपिक के कोड के अलावा अधिकारी की अनुमति देने का कोड अलग रहता था। ऐसे में प्रपत्रों की जांच भी अधिकारी ने ही की होगी। उन्होंने अधिकारी के आदेश का पालन किया था। पुराने कार्यालय में प्रपत्रों से छेड़छाड़ के मामले पहले भी प्रकाश में आए थे। ऐसे में उनके समय में कोई काम बिना अधिकारी के आदेश के नहीं हुआ।
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