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भूसे के विकल्प में गन्ने का चारा बना रहे पशुपालक

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गांव सलेमपुर दूदेमई में चारा के लिए गन्ना काटता किसान। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
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कायमगंज। पशुपालकों ने गेहूं के भाव बिक रहे भूसे का विकल्प तलाश लिया है। पशुपालक खेत में खड़े गन्ने को खरीद रहे हैं। किसानों को चीनी मिल से अधिक दाम मिलने पर वे पशुपालकों को गन्ना बेच रहे हैं। क्षेत्र के गांव सलेमपुर दूदेमई, बुढ़ानपुर, रजपालपुर, ज्योना, सैथरा आदि गांवों में पशुपालक गन्ना खरीदने के लिए पहुंच रहे हैं।
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दरअसल इन दिनों भूसे की किल्लत है। गेहूं के भाव भूसा बिक रहा है। गेहूं 20 रुपये किलो तो भूसा भी फुटकर में 20 रुपये किलो ही बिक रहा है। पशुओं के चारे के लिए इन दिनों पशुपालकों ने भूसे का विकल्प तलाश लिया है। वे गांव-गांव जाकर खेत में खड़े गन्ने को अगोला सहित 24 से 26 हजार रुपये बीघा खरीद रहे हैं।
पशुपालकों को गन्ने का चारा भूसे से सस्ता पड़ रहा है। साथ ही गन्ने का चारा पशुओं के लिए लाभदायक बताया जा रहा है। पशुपालक गन्ने को मशीन से कुटी बनाकर पशुओं को खिला रहे हैं। एक बीघा गन्ने की फसल चीनी मिल में 350 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचने पर 18 हजार रुपये की ही होती है। भुगतान में भी लेटलतीफी होती है। पशुपालक नकद भुगतान भी दे रहे हैं। इससे किसान के साथ पशुपालक भी खुश हैं।
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गांव मिलाकिया निवासी पशुपालक प्रदीप ने बताया कि एक बीघा गन्ने की अगोला सहित खरीद में करीब 75 क्विंटल वजन हो जाता है। इतना चारा मशीन से काटने का खर्च मिलाकर 25 से 26 हजार में हो जाता है। 75 क्विंटल भूसा डेढ़ लाख का होगा।
पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सुखदेव शाक्य ने बताया कि गन्ने को पशुपालक भूसे की महंगाई और हरे चारे के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे पशुओं में दूध बढ़ेगा। हालांकि लंबे समय तक इसे खिलाना पशुओं के लिए नुकसानदायक है।
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