एक लाख के जेवर बिक्री के ऊपर पैनकार्ड की अनिवार्यता को लेकर सर्राफा
व्यवसाइयों की बाजार बंदी फ्लाप रही। सराफा व्यापारियों का विरोध आंधे दिन
तक चला। ज्ञापन देने के बाद व्यापारी अपनी दुकानें खोलकर कारोबार करने लगे।
यही हाल कमालगंज सराफा बाजार का रहा। यहां भी दोपहर तक विरोध हुआ और शाम
को खुली दुकानों में रौनक दिखाई दी। फतेहगढ़ नगर में बंदी का असर शाम को भी
रहा।
एक लाख से ऊपर से खरीद पर पैन कार्ड की अनिवार्यता को लेकर सराफा
व्यवसायियों ने शुक्रवार सुबह दुकानें बंद कर विरोध प्रदर्शन किया। श्री
सर्राफा कमेटी फर्रुखाबाद के जिलाध्यक्ष अरुणप्रकाश तिवारी ददुआ की नेहरू
रोड स्थित दुकान से सराफा व्यापारियों ने जुलूस निकाला। जुलूस मुख्यमार्गों
से होता हुआ वापस नेहरू रोड पहुंचकर समाप्त हुआ। सर्राफों ने सिटी
मजिस्ट्रेट के आने पर ज्ञापन सौंपा। करीब एक बजे ज्ञापन देने के बाद
व्यापारियों ने दुकानें खोल लीं। शाम को बंदी का
असर नहीं दिखाई दिया।
सर्राफा दुकानों पर रौनक दिखाई दी। उधर, श्री सर्राफा कमेटी फतेहगढ़ की ओर
से बाजार बंदी की गई। सराफा दुकानदारों ने फतेहगढ़ चौराहा से कचहरी तिराहे
तक शांति मार्च निकालकर विरोध जताया। कलेक्ट्रेट के निकट सिटी मजिस्ट्रेट
को ज्ञापन दिया गया। दोपहर बाद फतेहगढ़ में बंदी का असर दिखाई दिया। यहां
शाम को दुकानें बंद रहीं।
इस अवसर पर श्री सर्राफा कमेटी फर्रुखाबाद के
जिलाध्यक्ष अरुण प्रकाश तिवारी ददुआ, जिला महामंत्री गोपाल वर्मा, जिला
कोषाध्यक्ष दीपक अग्रवाल, नगर अध्यक्ष मनोज रस्तोगी, नगर महामंत्री राजीव
शुक्ला, नगर कोषाध्यक्ष चंद्र किशोर वर्मा, कुमार चंद्र वर्मा, शरद
रस्तोगी, राजेश वर्मा, अमन वर्मा, सुदेश अग्रवाल, गौरव गुप्ता, सुमित
वर्मा, अमित वर्मा और श्यामजी वर्मा आदि मौजूद रहे।
कमालगंज प्रतिनिधि
के अनुसार व्यापार मंडल नगर अध्यक्ष ध्रुवप्रकाश मिश्र, राजेश वर्मा, सुरेश
गुप्ता, मुरारी, मुकेश, दुष्यंत कुमार और मोहन वर्मा आदि सर्राफा
व्यापारियों ने अपनी-अपनी दुकानें बंद कर जिला मुख्यालय आए। यहां आयोजित
पैदल मार्च में भाग लेकर व्यापारी नेता वापस कमालगंज पहुंचे। दोपहर 2 बजे
के बाद अधिकतर दुकानदारों ने सर्राफा दुकानें खोल दीं। इस तरह सुबह दुकानें
बंद रही और शाम को खुल गई।
इधर धरना, पास में दुकान खुली
नेहरू रोड
पर सर्राफा व्यापारी जहां बाजार बंदी करके धरना पर बैठे थे वहीं पास में
ही लाला राम भरोसे नरेशचंद्र ज्वैलर्स की दुकान खुली थी। दुकान के अंदर
बैठे ग्राहकों से खरीद फरोख्त हो रही थी।
बाजार बंदी को फ्लाप
ही कहा जाएगा। बाजार बंदी का मतलब है कि पूरे दिन बाजार बंद रहे लेकिन
सर्राफा व्यापारियों ने ऐसा नहीं किया। व्यापारियों के बाजार खोलने की
निंदा करते हैं। बाजार बंदी फ्लाप होने की खुद ही जिम्मेदारी लेते हैं।
अरुण प्रकाश तिवारी ददुआ, जिलाध्यक्ष, श्री सर्राफा कमेटी फर्रुखाबाद
चंद
लोगों की वजह से बाजार बंदी को फ्लाप कहा जा सकता है। हालांकि सुबह से ही
पदाधिकारियों ने घूम-घूमकर बाजार बंदी कराई थी। कुछ लोग इसके बावजूद
दुकानें खोले रहे। इससे बाजार बंद कराने में दिक्कत आई। सिटी मजिस्ट्रेट को
ज्ञापन देने के बाद सर्राफों ने अपनी दुकानें खोल दीं।
मनोज रस्तोगी (नगर अध्यक्ष, श्री सर्राफा कमेटी फर्रुखाबाद)