फर्रुखाबाद। 32 ग्राम पंचायतों में हुए भ्रष्टाचार की जांच लंबित चल रही है। कई ग्राम पंचायतों में रिकवरी निकलने के बाद जांच रिपोर्ट दबा दी गई। मनरेगा के कार्यों में फर्जी व अधिक भुगतान होने पर अधिकारियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। डीएम ने इन जांचों को निस्तारित कर रिपोर्ट मांगी है। यह जांचें वर्ष 2019 से मार्च 2022 तक की बताई गईं हैं।
बढ़पुर की ग्राम पंचायत वाहिदपुर के प्रधान के फर्जी हस्ताक्षर करके 14 लाख का भुगतान कर दिया गया। इसमें पांच अक्तूबर 2021 को पीडी ने बीडीओ, सचिव, टीए व रोजगार सेवक को नोटिस जारी की थीं। पिपरगांव में हैंडपंप रिबोर व मरम्मत पर 2020-21 में 32 लाख रुपये खर्च करने की जांच चार माह से चल रही है। इसमें सचिव ने पूरे अभिलेख ही नहीं सौंपे हैं।
नगला बसोला में भी छह माह पूर्व फर्म को ब्लैकलिस्ट करने के बाद किसी जिम्मेदार पर कार्रवाई नहीं हुई। ग्राम पंचायत जौरा की वर्ष 2019 से अब तक जांच ही पूरी नहीं की जा सकी। पहाड़पुर की वर्ष 2021 से जांच लंबित है।
इसके अलावा लोधीपुर, गंगलऊ परमनगर, सिवरई बरियार, रुदायन सहित 32 ग्राम पंचायतों की जांच निष्कर्ष तक नहीं पहुंचीं। इनमें कई ग्राम पंचायतें तो ऐसी हैं, जिनकी जांच तीन वर्ष से अधिक समय से लंबित हैं। इधर, जिलाधिकारी ने जांच अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है।