अमृतपुर। फर्रुखाबाद-बदायूं मार्ग पर बुधवार को अतिक्रमण पर बुलडोजर गरजा। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की जमीन पर अवैध कब्जा कर बनाई गईं 30 दुकानों को गिरा दिया गया। आठ मकानों का अधिकांश हिस्सा भी ध्वस्त कर दिया गया। अतिक्रमण हटाने के दौरान पीडब्ल्यूडी जेई से ग्रामीणों की नोकझोंक हुई। पुलिस की सख्ती के बाद मामला शांत हुआ।
बीते शुक्रवार को कुछ अवैध कब्जे हटाने के बाद तहसील प्रशासन ने लोगों को खुद ही पीडब्ल्यूडी की जमीन पर बने निर्माण तोड़ लेने की हिदायत दी थी। पांच दिन का समय मिलने के बाद भी लोगों ने कब्जे नहीं हटाए।
इस पर बुधवार को अतिक्रमण हटाने के लिए तहसीलदार संतोष कुमार, पीडब्ल्यूडी के जेई अंकित कुमार, वीरबहादुर पुलिस बल के साथ राजेपुर के निबिया चौराहे पर पहुंचे। निबिया चौराहे पर करीब 30 दुकानें व आठ मकान अतिक्रमण की जद में थे। बुलडोजर जैसे ही आगे बढ़ा लोग खुद ही दुकानें व मकान तोड़कर अतिक्रमण हटाने लगे।
गांव तुषौर निवासी श्याम बिहारी की दुकान तोड़ने के लिए बुलडोजर पहुंचा तो लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। जेई अंकित कुमार से नोकझोंक होने लगी। पुलिस की सख्ती पर मामला शांत हुआ। दोबारा नाप कराने के बाद उनकी पांच दुकानों का आधा हिस्सा ध्वस्त कर दिया गया। बाद में 25 और दुकानों को तोड़ा गया। अवैध कब्जा कर बनाए गए आठ मकानों को भी गिरा दिया गया।
दोबारा तहसीलदार को बुलाया गया
बुलडोजर से अतिक्रमण हटना शुरू हुआ तो कुछ ही देर में तहसीलदार संतोष कुमार कुशवाहा मौके से चले गए। जेई व ग्रामीणों के बीच जब नोकझोंक हुई तो जेई ने तहसीलदार को फोन कर दोबारा बुलाया। मामला शांत होने के बाद तहसीलदार फिर चले गए। जेई का कहना था कि अतिक्रमण हटने के दौरान मजिस्ट्रेट का मौजूद रहना अनिवार्य है।
लेखपाल पर लगे भेदभाव के आरोप
अतिक्रमण हटाने के दौरान लोगों ने क्षेत्रीय लेखपाल पर सही नाप न करने और भेदभाव करने का आरोप लगाया। ग्रामीणों कहना है कि जिससे सेटिंग हो गई उसका मकान बचा दिया गया है।