राजेपुर। दिल्ली विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर कोरोना पॉजिटिव होने पर दिल्ली से जिले में आए। उन्हें न तो सरकारी अस्पताल में भर्ती किया गया और न ही निजी अस्पताल में। थक हार कर मकान के एक कमरे में ही परिजनों ने क्वारंटीन कर दिया गया। उनकी हालत में सुधार नहीं हो रहा है।
थानाक्षेत्र के गांव नगला केवल निवासी युवक की छह माह पहले दिल्ली विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति हुई थी। उन्होंने गणित से पीएचडी की डिग्री हासिल की थी। प्रोफेसर को छह दिन पहले बुखार आया। उन्होंने कोरोना की जांच करवाई, तो शुक्रवार को रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इस पर उन्होंने गांव में रह रहे भाई को फोन पर सूचना दी। भाई एंबुलेंस से उन्हें लेकर आवास विकास स्थित एक निजी अस्पताल पहुंचे। वहां भर्ती करने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्हें लोहिया अस्पताल ले जाया गया, वहां भी भर्ती नहीं किया गया। परेशान होकर वह अपने भाई को घर ले आए और घर के एक कमरे में ही क्वारंटीन कर दिया है। फिलहाल उनका देशी इलाज किया जा रहा है। हालत में कोई खास सुधार नहीं हो रहा हैै। परिवार के लोग काफी चिंतित हैं।