भोलेपुर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पसरा सन्नाटा। संवाद
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फर्रुखाबाद/कंपिल। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में लगे आरोग्य मेलों में कई जगह डॉक्टर ही नहीं पहुंचे। फार्मासिस्टों ने ही मरीज देखकर दवाई दी। डॉक्टर न होने से मरीजों को उचित परामर्श और इलाज नहीं मिल पा रहा है।
जिले में शहर के चार और ग्रामीण क्षेत्र के 31 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर रविवार को आरोग्य मेला लगा। फतेहगढ़ के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भोलेपुर में दो डॉक्टरों डॉ. नमिता निगम और डॉ. स्मिता शाक्य की ड्यूटी थी। दोनों डॉक्टरों के न पहुंचने पर फार्मासिस्ट अखिलेश कुमार ने ही मरीजों को देखकर दवा दी। दोपहर 1:30 बजे अस्पताल में एक भी मरीज न होने से सन्नाटा पसरा था। बताया गया कि ओपीडी में कुल पांच मरीज आए थे।
इनमें दो मरीज खांसी, जुकाम और बुखार के थे, जबकि दो मरीज जोड़ों में दर्द से परेशान थे। एक को आंख में दिक्कत थी। सभी को दवाई दी गई। एलटी विनय कुमार ने पांच लोगों की कोरोना जांच की। सभी की रिपोर्ट निगेटिव रही। नवाबगंज के पीएचसी अचरिया बाकरपुर में 38 मरीज पहुंचे। इनमें सबसे अधिक मरीज बुखार, खांसी, खुजली, मधुमेह के थे। डॉ. श्याम किशोर ने परीक्षण के बाद दवाई दी।
कंपिल क्षेत्र के पीएचसी बिल्सड़ी में हुआ आरोग्य मेला फार्मासिस्ट के भरोसे रहा। डॉक्टरों के न आने से टीकाकरण तक ही स्वास्थ्य सेवाएं सीमित हैं। दोपहर दो बजे फार्मासिस्ट राजीव कुमार, स्टाफ नर्स विभा सिंह व एएनएम प्रियंका मिलीं। एक मेज पर टीका लगाने के लिए सिरिंज रखी थीं। छह से अधिक मरीज डॉक्टर के इंतजार में खड़े थे। फार्मासिस्ट राजीव कुमार ने बताया कि सीएचसी कायमगंज के डॉ. विपिन कुमार की ड्यूटी है।
इमरजेंसी ड्यूटी लग जाने से वह नहीं पहुंचे। भतीजी अंजली की चोट का उपचार कराने आईं कमलेश व दर्द की दवा लेने आईं भगवानश्री ने आरोप लगाया कि डॉक्टर आते ही नहीं हैं। सही उपचार न मिलने से सामान्य बीमारी भी ठीक होने में कई दिन लग जाते हैं। बाद में फार्मासिस्ट ने मरीजों को दवाइयां दीं।