फर्रुखाबाद। व्यापारी पर जानलेवा हमले की साजिश का आरोपी बसपा नेता अनुपम दुबे रिमांड के लिए गुरुवार को सीजेएम कोर्ट में पेश हुआ। आरोपी के वकील ने अदालत को मोबाइल पर हमले का वीडियो दिखाया। वकील के अनुसार वीडियो में व्यापारी हाथ में राइफल लिए और दूसरी ओर के लोग पत्थर लिए दिख हैं। वीडियो घटना के बाद सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात भी वकील ने कही है।
शहर के मोहल्ला मजीद स्ट्रीट निवासी व्यापारी मोहन अग्रवाल 10 अक्तूबर 2020 को अपने ऊपर जानलेवा हमले और रंगदारी मांगने का मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने मोहल्ला वृंदावन वाली गली निवासी सोनी रस्तोगी, बंशी रस्तोगी, गौरव गुप्ता और तीस अज्ञात लोगों के खिलाफ तहरीर दी थी। विवेचक सीओ सिटी नितेश सिंह ने बसपा नेता अनुपम के भाई अनुराग दुबे उर्फ डब्बन का नाम जोड़कर 24 सितंबर को गिरफ्तार कर लिया। अनुपम दुबे पर भी हमला करने की साजिश रचने की धारा लगाई गई। गुरुवार को आरोपी अनुपम को रिमांड के लिए सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया।
आरोपी के वकील जितेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि अदालत में घटना का वीडियो मोबाइल पर दिखाया गया। वीडियो में व्यापारी मोहन अग्रवाल राइफल लिए दिखाई दे रहे हैं और दूसरी ओर कुछ लोग हाथों पत्थर लिए हैं। सीजेएम ने सुनवाई के बाद आरोपी अनुपम को चौदह दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के आदेश दिए। मुकदमे में अगली सुनवाई 21 अक्तूबर को होगी। कचहरी में सीओ अजेय कुमार शर्मा की अगुवाई में फतेहगढ़, जहानगंज एसओ, राजेपुर थानों की फोर्स के अलावा पीएसी तैनात रही।
विवेचक के न आने पर सीजेएम ने लगाई फटकार
मुकदमे की विवेचना सीओ सिटी नितेश सिंह कर रहे हैं। रिमांड पर पेशी से पहले केस डायरी लेकर शहर कोतवाल विनोद कुमार शुक्ला पहुंचे। सीजेएम ने फटकार लगाकर विवेचक को केस डायरी प्रस्तुत करने के आदेश दिए। सीओ सिटी नितेश सिंह के अवकाश पर होने के कारण उनके स्थान पर सीओ अमृतपुर अजेय कुमार शर्मा केस डायरी लेकर सीजेएम के समक्ष पेश हुए।
अनुपम के वकील ने उठाए सवाल
वकील जितेंद्र सिंह चौहान ने कोर्ट में कहा कि मुकदमे में अनुपम को
फंसाया जा रहा है। अनुपम मोहन अग्रवाल के खिलाफ विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं। व्यापारी अनुपम और उनके परिवार के सभी लोगों को जानते हैं फिर अज्ञात में मुकदमा क्यों दर्ज कराया। जिस जमीन का विवाद है उससे बसपा नेता व परिवार के किसी सदस्य का लेनादेना नहीं है। क्रास मुकदमे दर्ज हुए थे। शासनादेश के अनुसार विवेचना एक ही विवेचक को करनी चाहिए लेकिन एक मुकदमे में शहर कोतवाल और दूसरे में सीओ सिटी विवेचक हैं। अनुपम के 14 जुलाई को जेल जाने के बाद ही पर्चे क्यों काटे गए। विवेचक इतने महीनों तक नाम प्रकाश में क्यों नहीं लाए। केस डायरी में वीडियो से काट कर फोटो लगाए गए थे। सीजेएम ने सीओ से नाराजगी जाहिर कर वीडियो सीडी में पेश करने के आदेश दिए। सुनवाई 20 अक्तूबर को होगी।
वाहनों में लगे थे सीसीटीसी कैमरे
परिजनों ने हाईकोर्ट में मैनपुरी जेल से पेशी पर आते जात समय डॉ. अनुपम दुबे की हत्या की आशंका जताई थी। इस पर मैनपुरी जेल से पेशी पर लाने वाले वाहनों को सीसीटीवी कैमरों से लैस कर दिया गया था। वाहन के दोनों ओर और अंदर कैमरे लगाए गए थे। जीपीएस सिस्टम भी लगा था। चालक को माइक्रो माइक मुहैया कराया गया था।